दामोदर की लहरों से जंग जीतने वाली साहसी बुजुर्ग महिला

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पूर्व बर्दवान :  यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उस अडिग साहस की मिसाल है जो जीवन और मृत्यु के बीच खड़ी होकर भी हार नहीं मानता। दामोदर नदी के तेज बहाव में बह जाने के बाद लगभग सत्तर वर्षीया एक बुजुर्ग महिला ने असंभव को संभव कर दिखाया — उन्होंने लगभग पैंतीस किलोमीटर की दूरी बहते हुए तय की और अंततः एक बांस के खंभे को पकड़कर अपनी जान बचा ली। यह घटना रविवार को पूर्व बर्दवान जिले के रायना और जमालपुर थाना क्षेत्र के बीच घटित हुई।

नदी में स्नान करते समय फिसलीं और बह गईं
रायना थाना क्षेत्र के जाकता गाँव की रहने वाली मातुरी टुडू रोज की तरह रविवार सुबह दामोदर नदी में स्नान करने गई थीं। किनारे से लौटते वक्त अचानक उनका पैर फिसला और वे गहरे पानी में जा गिरीं। नदी उस समय उफान पर थी। तेज धारा में मातुरी का शरीर बहने लगा, परंतु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पहले तो वे तैरने की कोशिश करती रहीं, फिर जब बहाव बढ़ा तो उन्होंने आसपास उग आए जलकुंभी और पौधों की जड़ों को पकड़कर खुद को संभालने का प्रयास किया।

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घंटों तक जीवित रहने की जंग लड़ी
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मातुरी को बहता देख कुछ लोगों ने शोर मचाया, लेकिन नदी के बहाव ने किसी को पास जाने नहीं दिया। मातुरी कई बार पानी में डूबीं, कई बार सतह पर आईं। उन्होंने बताया कि पानी की लहरों से लड़ते हुए उनके हाथ-पाँव थक चुके थे, मगर मन में बस एक ही उम्मीद थी — “मुझे घर वापस लौटना है।” धीरे-धीरे शाम ढलने लगी, आसमान अंधकार में घिर गया, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा।

पैंतीस किलोमीटर बहकर पहुँचीं दूसरे इलाके में
लगभग पाँच घंटे तक लगातार बहने के बाद मातुरी जमालपुर थाना क्षेत्र के मुइदीपुर इलाके में पहुँच गईं। यह वह स्थान है जहाँ दामोदर नदी दो भागों में बँट जाती है — एक धारा मुंडेश्वरी के नाम से जानी जाती है और दूसरी दामोदर कहलाती है। संयोग से वहाँ नदी किनारे बांसों से बना एक तटबंध मौजूद था। मातुरी ने जैसे ही बांस का खंभा देखा, अपनी शेष शक्ति लगाकर उसे पकड़ लिया।

स्थानीय लोगों ने बचाई जान, अस्पताल में भर्ती
कुछ समय बाद स्थानीय मछुआरों ने उनकी आवाज़ सुनी और मदद के लिए दौड़े। जब उन्हें किनारे लाया गया, तब तक उनके शरीर पर खरोंचें और घाव थे, मगर वे होश में थीं। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। इसके बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत अब स्थिर है।

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लोग बोले – यह है इंसानी जज़्बे की मिसाल
घटना की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई। लोगों का कहना है कि मातुरी टुडू की जिजीविषा ने यह साबित कर दिया कि मनुष्य की इच्छाशक्ति किसी भी परिस्थिति पर भारी पड़ सकती है। एक ग्रामीण ने कहा, “जहाँ लोग थोड़ी सी मुश्किल में टूट जाते हैं, वहाँ इस दादी ने पाँच घंटे तक मौत से लड़ाई लड़ी।”

पूर्व बर्दवान के अधिकारी भी इस घटना को “अद्भुत साहस” का उदाहरण बताते हुए कह रहे हैं कि मातुरी टुडू का यह साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाएगा।

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