
जामुरिया : पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हाल ही में हुए ब्लॉक स्तर के संगठनात्मक फेरबदल के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा राज्यभर में नए पदाधिकारियों की घोषणा के बाद जहां कई जगहों पर जश्न का माहौल देखने को मिला, वहीं कुछ स्थानों पर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं।
पश्चिम बर्दवान जिले के जामुरिया ब्लॉक-एक में सुब्रत अधिकारी को एक बार फिर ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उपाध्यक्ष का पद शेख शानदार को सौंपा गया है। नई जिम्मेदारियों की घोषणा के बाद से शेख शानदार समर्थकों में उत्साह का माहौल है। उनके समर्थकों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर अपनी खुशी जताई। दूसरी ओर, सुब्रत अधिकारी गुट भी इसे “पार्टी की मजबूती का प्रतीक” बताते हुए अपने स्तर पर जनसंपर्क कार्यक्रम चला रहे हैं।
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जागो बांग्ला’ स्टॉल ने बढ़ाया विवाद
विवाद तब शुरू हुआ जब दुर्गापूजा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर “जागो बांग्ला” अभियान के तहत हर ब्लॉक में पार्टी सूचना स्टॉल लगाने का आदेश दिया गया। जामुरिया में यह पहल कुछ अलग अंदाज में सामने आई। यहां ब्लॉक अध्यक्ष सुब्रत अधिकारी की ओर से एक स्टॉल लगाया गया, तो थोड़ी दूरी पर उपाध्यक्ष शेख शानदार के समर्थकों ने एक अलग काउंटर स्थापित कर दिया। दोनों स्टॉलों पर अलग-अलग बैनर और झंडे दिखने से स्थानीय लोगों में चर्चा शुरू हो गई कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अब खुलकर दो धड़े उभर आए हैं।

भाजपा ने साधा निशाना, कहा—‘टीएमसी में दो फाड़’
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने तृणमूल पर निशाना साधा है। भाजपा नेता संतोष सिंह ने कहा, “जामुरिया में अब कोई रहस्य नहीं बचा है। तृणमूल कांग्रेस दो हिस्सों में बंट चुकी है। जहां अध्यक्ष का गुट खुद को असली संगठन बता रहा है, वहीं उपाध्यक्ष समर्थक समानांतर गतिविधियां चला रहे हैं। जनता यह सब देख रही है, और आने वाले चुनाव में इसका जवाब जरूर देगी।”
सुब्रत अधिकारी ने दी सफाई, कहा—‘पार्टी में कोई मतभेद नहीं’
हालांकि, ब्लॉक अध्यक्ष सुब्रत अधिकारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “पार्टी में किसी तरह का मतभेद नहीं है। जागो बांग्ला का केवल एक ही स्टॉल लगाया गया था। जगह की कमी के कारण पास में एक और टेबल लगाई गई थी। इसे विरोधी दल गुटबाजी का रूप देकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।”

स्थानीय स्तर पर बढ़ी चर्चाएं, कार्यकर्ता असमंजस में
इन घटनाओं के बाद जामुरिया में राजनीतिक चर्चाओं का दौर गर्म है। कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन की नई टीम को जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि बार-बार के गुटीय विवाद से जमीनी स्तर पर पार्टी की छवि कमजोर हो रही है।
विश्लेषकों की राय—संगठन में एकता बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने ब्लॉक स्तर पर युवाओं और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है, लेकिन कई इलाकों में यह प्रयोग असंतोष का कारण बन रहा है। जामुरिया का मामला उसी असंतुलन की झलक पेश करता है।
अब सवाल यह है कि क्या तृणमूल कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इन आंतरिक मतभेदों को दूर कर एकजुट होकर मैदान में उतर पाएगी, या फिर यह गुटबाजी पार्टी के लिए चुनौती बन जाएगी।














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