
आसनसोल : मुर्गासोल स्थित अंकुर सुकृति फ्लैट ओनर्स एसोसिएशन की ओर से शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर रंगारंग रास-गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया। फ्लैट परिसर में सजे रंग-बिरंगे मंच, झिलमिलाती रोशनी और पारंपरिक परिधानों से सजे लोगों ने ऐसा माहौल बना दिया मानो पूरा आसनसोल गुजराती लोक-संस्कृति के रंग में रंग गया हो।
इस मौके पर एसोसिएशन के सभी सदस्य परिवार सहित उपस्थित रहे। आयोजन की शुरुआत देवी लक्ष्मी की पूजा और चंद्र देव की आराधना के साथ हुई। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और इस रात का चांद अमृत बरसाता है। इसी शुभ अवसर पर लोग रातभर रास-डांडिया और गरबा के जरिए उल्लास मनाते हैं।

महिलाओं ने सजधजकर किया पारंपरिक गरबा नृत्य
रात करीब सात बजे कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गरबा नृत्य से हुई। महिलाओं ने रंग-बिरंगे लहंगा-चुन्नी और ओढ़नियों में सजे पारंपरिक ड्रेस कोड के साथ एक गोल घेरे में नृत्य प्रस्तुत किया। उनके साथ युवतियों ने भी बॉलीवुड और गुजराती लोकगीतों की धुन पर मनमोहक प्रस्तुति दी। संगीत की लय पर नाचते हुए सभी प्रतिभागियों ने तालियों की गूंज और झंकार से पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया।
बच्चों ने भी दिखाई उत्साह से भरी प्रतिभा
कार्यक्रम में छोटे बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने आधुनिक और पारंपरिक दोनों शैलियों का संगम पेश किया। दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति पर खूब तालियां बजाईं। वहीं युवाओं ने जोश से भरे डांडिया नृत्य में अपनी ऊर्जा और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन किया।
संस्कृति और एकता का प्रतीक बना आयोजन
फ्लैट एसोसिएशन के सचिव संजय अग्रवाल ने बताया कि हर साल शरद पूर्णिमा के अवसर पर यह आयोजन किया जाता है ताकि निवासियों के बीच सौहार्द और एकता बनी रहे। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का एक माध्यम है। इस तरह के आयोजन से परिवारों के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ता है।”
रात्रिभोज और चंद्रदर्शन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी परिवारों ने सामूहिक रूप से दूध-खीर का प्रसाद ग्रहण किया और पूर्ण चंद्रमा का दर्शन किया। इस दौरान आयोजन स्थल पर भक्तिमय संगीत बजता रहा। चांदनी रात में झिलमिल रोशनी और संगीत के संग लोगों ने देर रात तक गरबा और डांडिया का आनंद लिया।

स्थानीय लोगों ने की सराहना
कार्यक्रम की सफलता के बाद उपस्थित अतिथियों और स्थानीय निवासियों ने एसोसिएशन की सराहना की। उनका कहना था कि ऐसे आयोजन न केवल त्योहारों की खुशी को बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को भी मजबूत करते हैं।
शरद पूर्णिमा के इस अवसर पर अंकुर सुकृति आवासीय परिसर सचमुच एक लघु “गुजरात” में तब्दील हो गया, जहाँ हर उम्र का व्यक्ति आनंद, संगीत और भक्ति में सराबोर दिखाई दिया।














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