
आसनसोल : पश्चिम बंगाल और झारखंड के बीच जल प्रबंधन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। बुधवार को झारखंड स्थित दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) के मुख्य कार्यालय के बाहर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य के कानून एवं श्रम मंत्री मलय घटक ने किया। भारी संख्या में पहुंचे टीएमसी कार्यकर्ताओं ने डीवीसी प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने बिना पूर्व सूचना के माइथन और पंचेत बांधों से हजारों क्यूसेक पानी छोड़ दिया, जिससे पश्चिम बंगाल के कई निचले इलाके जलमग्न हो गए।
प्रदर्शन के दौरान “डीवीसी होश में आओ”, “बंगाल को डुबाना बंद करो” और “ममता बनर्जी के आदेश का सम्मान करो” जैसे नारे गूंजते रहे। कार्यकर्ताओं के जोश और नारों के बीच मंत्री मलय घटक ने मीडिया से कहा कि डीवीसी का यह कदम पूरी तरह “गैरजिम्मेदाराना” और “जनविरोधी” है। उन्होंने कहा, “पिछले सप्ताह झारखंड और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में भारी बारिश हुई थी। इसके बावजूद डीवीसी ने बिना राज्य सरकार को सूचित किए अचानक पानी छोड़ दिया। इस वजह से पश्चिम बर्धमान, दुर्गापुर, रानीगंज और आसनसोल के कई हिस्से बाढ़ के पानी में डूब गए। हजारों लोग विस्थापित हुए, सैकड़ों घरों में पानी घुस गया।”
मलय घटक ने आगे कहा, “डीवीसी को यह समझना चाहिए कि यह केवल तकनीकी मामला नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जान-माल की सुरक्षा का सवाल है। जब तक राज्य सरकार को पहले से सूचना नहीं दी जाएगी, तब तक बाढ़ नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाना असंभव है। यह बेहद अफसोसजनक है कि केंद्र के अधीन आने वाला डीवीसी लगातार बंगाल सरकार की भावनाओं की अनदेखी करता रहा है।”

प्रदर्शन के दौरान टीएमसी नेताओं ने डीवीसी अधिकारियों को एक स्मारक पत्र (मेमोरेंडम) भी सौंपा। इसमें साफ कहा गया कि भविष्य में किसी भी जलाशय से पानी छोड़ने से पहले संबंधित राज्य सरकारों — विशेषकर पश्चिम बंगाल — को अनिवार्य रूप से सूचित किया जाए। मेमोरेंडम में यह भी उल्लेख किया गया कि “बिना समन्वय के पानी छोड़ने की हरकत को अगर जारी रखा गया तो तृणमूल कांग्रेस जन-आंदोलन की राह अपनाएगी।”
इस मौके पर रानीगंज विधायक तापस बनर्जी, जिला तृणमूल कांग्रेस के सह-अध्यक्ष हरेराम सिंह, जिला सभाधिपति विश्वनाथ बाउरी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूरे परिसर को पुलिस ने सुरक्षा घेरे में रखा था, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे।
उधर, स्थानीय सूत्रों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से झारखंड और बंगाल के कई इलाकों में भारी वर्षा हो रही है। माइथन और पंचेत डैम में जलस्तर तेजी से बढ़ जाने के कारण डीवीसी ने आपात स्थिति में पानी छोड़ा। लेकिन बंगाल सरकार का आरोप है कि यदि समय रहते सूचना दी जाती, तो निचले इलाकों में पहले से तैयारी कर ली जाती। परिणामस्वरूप आसनसोल, दुर्गापुर और बर्धमान के निचले हिस्सों में जलभराव और फसलों की भारी क्षति नहीं होती।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि हर वर्ष यही स्थिति बनती है, जब डीवीसी बिना राज्य सरकार की सहमति के अचानक पानी छोड़ देता है। “जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,” — मलय घटक ने सख्त लहजे में कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने डीवीसी को इस तरह की मनमानी से नहीं रोका, तो टीएमसी राज्यभर में जन आंदोलन छेड़ेगी और आवश्यकता पड़ी तो दिल्ली तक मार्च करेगी।
मंत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हमेशा लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं। लेकिन केंद्र के अधीन डीवीसी बार-बार उसी जनता को मुसीबत में डाल देता है, जिनकी सेवा का वादा वह करता है।” उन्होंने आगे कहा कि बंगाल सरकार ने डीवीसी के रवैये के खिलाफ पहले भी कई बार केंद्र को पत्र लिखा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इस प्रदर्शन ने एक बार फिर झारखंड-बंगाल के बीच नदी प्रबंधन और जल वितरण को लेकर समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डीवीसी, जो एक केंद्रीय संस्था है, को राज्य सरकारों के साथ समन्वय में सुधार लाना चाहिए। बिना सूचना के पानी छोड़े जाने से हर साल हजारों लोगों को नुकसान झेलना पड़ता है — फसलें नष्ट होती हैं, घर डूबते हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
फिलहाल, डीवीसी ने इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। वहीं, टीएमसी ने ऐलान किया है कि यदि आने वाले दिनों में इसी तरह की घटना दोहराई गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। बंगाल की जनता अब “बिना पूर्व सूचना के बाढ़” को नियति नहीं मानने वाली — यह संदेश टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पूरे दमखम के साथ दिया।














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