सांसद- विधायक पर हमले के विरोध में आसनसोल में भाजपा का बवाल

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आसनसोल :  पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में भाजपा सांसद खगन मुर्मू और विधायक शंकर घोष पर हुए कथित हमले के विरोध में सोमवार को आसनसोल की सड़कों पर भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। भाजपा मंडल-एक, दो और तीन की संयुक्त पहल पर उषाग्राम जीटी रोड पर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ। कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाकर ममता सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए।

सुबह करीब दस बजे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन जल्द ही उग्र रूप लेने लगा। सड़क के बीचोंबीच धधकते टायरों से निकलता धुआँ पूरे इलाके में फैल गया। “सांसद पर हमला मतलब लोकतंत्र पर हमला”, “ममता सरकार होश में आओ” और “लोकतंत्र बचाओ, भाजपा को मत दबाओ” जैसे नारे घंटों तक गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने से जीटी रोड पर लगभग चालीस मिनट तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। कई वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं और पुलिस या प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। एक मंडल अध्यक्ष ने कहा, “अगर सांसद और विधायक भी राज्य में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?” उन्होंने दावा किया कि यह हमला पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसका उद्देश्य भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता को दबाना है।

स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि जलपाईगुड़ी में भाजपा सांसद खगन मुर्मू और विधायक शंकर घोष बीते रविवार को बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत सामग्री लेकर पहुंचे थे। लोगों की सहायता के बाद जब वे लौट रहे थे, तभी कुछ अराजक तत्वों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। इस घटना में सांसद खगन मुर्मू के सिर में गंभीर चोट आई, जबकि विधायक शंकर घोष को भी कई जगह चोटें लगीं। घटना के बाद दोनों नेताओं को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

भाजपा ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। जिला भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “राज्य प्रशासन पूरी तरह मौन है। यह चुप्पी दर्शाती है कि कहीं न कहीं इस हमले के पीछे सत्तारूढ़ दल का हाथ है। अगर दोषियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार नहीं किया गया, तो भाजपा राज्यव्यापी आंदोलन करेगी।”

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए कई दौर की बातचीत की। हालांकि भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यह केवल चेतावनी है। “अगर राज्य सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में सड़कों पर और भी बड़ा आंदोलन होगा,”— ऐसा चेतावनी भरा बयान कार्यकर्ताओं ने दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस समय प्रदर्शन चल रहा था, उस दौरान बाजारों में अफरा-तफरी मच गई। कई दुकानदारों ने एहतियातन अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। वाहनों का रूट डायवर्ट करना पड़ा, जिससे शहर के अन्य हिस्सों में भी यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने देर शाम तक स्थिति सामान्य कर दी, लेकिन राजनीतिक गरमाहट बनी रही।

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इस घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य में लगातार ऐसी घटनाएँ हो रही हैं, जहाँ विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह हमला केवल भाजपा नेताओं पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला है। जनता अब चुप नहीं बैठेगी।”

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को “राजनीतिक नाटक” बताया। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि “भाजपा हर मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। पुलिस जांच कर रही है, दोषी जो भी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

हालाँकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह विवाद आने वाले समय में राज्य की राजनीति को और गरमाएगा। जलपाईगुड़ी की घटना और उसके विरोध में आसनसोल में हुए प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की सियासत में टकराव की आग अब और भड़क सकती है। भाजपा ने चेतावनी दी है कि “अगर हमले करने वालों को जल्द सजा नहीं मिली, तो बंगाल की हर सड़क विरोध का मैदान बनेगी।”

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