
दुर्गापुर : एक नाबालिग लड़की की ज़िंदगी बर्बाद होने से ठीक पहले ही पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सतर्कता ने उसकी किस्मत बदल दी। बीते रात सागरभांगा-घुशिकडांगा इलाके में एक चुपचाप चल रही शादी की तैयारी को रोकते हुए पुलिस ने बाल विवाह की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। इस कार्रवाई ने न केवल एक बच्ची को असमय विवाह के बंधन में बँधने से बचाया, बल्कि समाज को भी एक सशक्त संदेश दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
जानकारी के अनुसार, उक्त नाबालिग लड़की के पिता का कुछ समय पहले निधन हो चुका है। आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के चलते उसकी माँ ने बेटी की शादी जल्द करने का निर्णय लिया था। बताया जाता है कि लड़की की शादी तीन दिन बाद तय थी और दूल्हा किसी दूसरे राज्य का निवासी था। परिवार ने रिश्तेदारों को सूचना दिए बिना ही शादी की तैयारियाँ शुरू कर दी थीं — घर में सजावट, कपड़े, आभूषण और यात्रा की व्यवस्था लगभग पूरी हो चुकी थी।

लेकिन, इस पूरे मामले की भनक दुर्गापुर स्थित एक स्वयंसेवी संस्था को लग गई। संस्था के सदस्यों को किसी स्थानीय व्यक्ति ने गुप्त सूचना दी कि एक नाबालिग लड़की की शादी की तैयारी की जा रही है। सूचना मिलते ही संस्था ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस को सूचित किया। देर शाम पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम मौके पर पहुँची और घर में चल रही तैयारियों को रोक दिया।
जाँच के दौरान पता चला कि लड़की की उम्र अभी 17 वर्ष से भी कम है। टीम ने लड़की की माँ से पूछताछ की और विवाह से संबंधित सभी दस्तावेज़ खंगाले। जब यह स्पष्ट हो गया कि बाल विवाह की तैयारी चल रही है, तो पुलिस ने कठोरता से चेतावनी दी और लड़की की माँ से लिखित मुचलका लिया कि वह बेटी की शादी 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले नहीं करेगी।
स्वयंसेवी संस्था के एक सदस्य ने बताया कि यह मामला भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील था। “लड़की की माँ सामाजिक दबाव और गरीबी से घिरी थी, इसलिए उसने यह कदम उठाया। पर हमने उसे समझाया कि बेटी की कम उम्र में शादी उसके भविष्य को बर्बाद कर देगी,” उन्होंने कहा।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है बल्कि यह एक सामाजिक कुरीति भी है, जो बालिकाओं के जीवन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
संस्था के सदस्यों ने आसपास के लोगों से भी अपील की कि यदि कहीं किसी नाबालिग की शादी की तैयारी होती दिखे, तो तुरंत पुलिस या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दें। उन्होंने कहा कि समाज तभी बदलेगा जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और आवाज उठाए।

स्थानीय लोगों ने भी पुलिस और संस्था की इस कार्रवाई की सराहना की। उनका कहना है कि अगर समय पर कदम नहीं उठाया जाता, तो एक नाबालिग की ज़िंदगी अंधकार में डूब जाती। अब लड़की को पुनः स्कूल भेजने की योजना बनाई जा रही है, ताकि वह आगे की पढ़ाई पूरी कर सके।
इस घटना के बाद इलाके में जागरूकता का माहौल बना है। कई महिलाओं ने स्वयंसेवी संस्था से संपर्क कर यह जानने की इच्छा जताई कि कानून के तहत बाल विवाह को कैसे रोका जा सकता है।














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