दुर्गापूजा में शराब बिक्री ने तोड़े सारे पुराने रिकॉर्ड

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आसनसोल :  इस साल पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के अवसर पर उल्लास, रौनक और जश्न के बीच शराब की बिक्री ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ डाले। पाँचमी से लेकर नवमी तक प्रदेश भर में शराब दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई। दुकानदारों के अनुसार, इस बार ग्राहकों की संख्या बीते वर्षों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक रही। राज्य भर में लाखों लीटर शराब बिकने से आबकारी विभाग की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग की रिपोर्ट बताती है कि दुर्गापूजा के चार प्रमुख दिनों — षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी और नवमी — में राज्य में करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक की शराब बिकी। यह अब तक का सबसे ऊँचा आंकड़ा है। दिलचस्प बात यह रही कि इस बार विदेशी शराब की अपेक्षा देशी ब्रांडों की माँग ज़्यादा रही। सस्ती दरों और ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में आसान उपलब्धता इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है।

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हालाँकि दशमी के दिन गांधी जयंती के अवसर पर राज्य सरकार ने उस दिन को ‘ड्राई डे’ घोषित किया था, जिससे एक दिन के लिए शराब की बिक्री बंद रही। बावजूद इसके, लोगों ने त्योहार की मस्ती पर कोई असर नहीं पड़ने दिया। अधिकांश शराब उपभोक्ताओं ने पहले ही अपने इंतज़ाम कर लिए थे। दुकानों में पाँचमी से ही जमकर खरीदारी हुई थी।

राज्य के लगभग सभी जिलों में शराब बिक्री में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिला। पूर्व मेदिनीपुर जिला इस बार बिक्री में सबसे आगे रहा। जिले में षष्ठी से नवमी तक कुल 33 करोड़ 87 लाख रुपये की शराब बिकी। विशेषज्ञों का मानना है कि दीघा, मंदरमणि और ताजपुर जैसे पर्यटन स्थलों पर हजारों पर्यटकों की मौजूदगी ने शराब की बिक्री को कई गुना बढ़ा दिया। होटल, समुद्र तट और रेस्टोरेंटों में देर रात तक जश्न चलता रहा।

दूसरी ओर, पूर्व बर्दवान जिले में भी शराब बिक्री ने पिछले सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए। आबकारी विभाग के अनुसार, दुर्गापूजा से लेकर लक्ष्मी पूजा तक जिले में कुल 57 करोड़ रुपये की शराब बिकी। इसमें देशी शराब की बिक्री 4 लाख 80 हजार लीटर, विदेशी शराब 3 लाख 30 हजार लीटर और बीयर 4 लाख 10 हजार लीटर रही। आँकड़ों के अनुसार, यह बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक है।

आबकारी अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान शराब की खपत बढ़ना अब एक सामान्य प्रवृत्ति बन गई है। परंतु इस बार की वृद्धि अपेक्षाओं से कहीं अधिक रही। एक अधिकारी ने कहा, “लोगों ने लंबे समय बाद इस तरह खुले दिल से त्योहार मनाया। होटल, बार और पर्यटन स्थलों में भीड़ इतनी रही कि कई जगह शराब का स्टॉक बीच में ही खत्म हो गया।”

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वहीं, सामाजिक संगठनों ने शराब की बढ़ती खपत पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि त्योहारों में आनंद लेना अच्छी बात है, लेकिन नशे की आदत समाज के लिए नुकसानदेह है। कई संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह शराब दुकानों के समय और बिक्री पर नियंत्रण कड़े करे, ताकि सार्वजनिक व्यवस्था पर विपरीत असर न पड़े।

आबकारी विभाग का मानना है कि आगामी कालीपूजा और छठ पर्व के दौरान भी शराब की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। विभाग ने इस बार रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त किया है और भविष्य में डिजिटल निगरानी बढ़ाने की योजना भी बनाई है।

कुल मिलाकर, इस बार की दुर्गापूजा सिर्फ भक्ति और आस्था का पर्व नहीं रही, बल्कि व्यापार और उपभोग के लिहाज से भी नए आयाम लेकर आई। शराब कारोबारियों के लिए यह उत्सव ‘सोने पर सुहागा’ साबित हुआ, जबकि सरकार के खजाने में भी अरबों रुपये की आमदनी हुई।

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