
दुर्गापुर : पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा से हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले ने पूरे राज्य की राजनीति को झकझोर दिया है। सोमवार को पुलिस ने चौथे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वह दुर्गापुर नगर निगम का अस्थायी कर्मचारी बताया जा रहा है। अब तक चार आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, जबकि एक अभी भी फरार है। सभी को सोमवार को दुर्गापुर अनुमंडल न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस ने पांचों आरोपियों के डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
FIR में पांच नाम, एक आरोपी अब भी फरार
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में दर्ज एफआईआर में पांच लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें से एक फरार आरोपी की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। वहीं, जांच दल ने पीड़िता के मित्र और सहपाठी को भी पूछताछ के लिए हिरासत में रखा है, जो घटना के वक्त उसके साथ था। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि वारदात की रात क्या हुआ और किस परिस्थिति में छात्रा को अकेला छोड़कर वह वहां से चला गया।
ममता बनर्जी के बयान से मचा सियासी बवाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि “लड़की और उसका दोस्त रात 12.30 बजे कॉलेज कैंपस के बाहर थे।” उनके इस बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया।
पीड़िता के पिता ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा — “मेरी बेटी पर अत्याचार रात 8 से 9 बजे के बीच हुआ, जबकि मुख्यमंत्री ने गलत समय बताकर घटना को छोटा दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने जिस तरह से कहा कि लड़कियों को रात में बाहर नहीं निकलना चाहिए, वह बेहद असंवेदनशील टिप्पणी है।”
मुख्यमंत्री की सफाई— बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया

विवाद बढ़ने के बाद सोमवार को ममता बनर्जी ने सफाई दी कि मीडिया ने उनके बयान का गलत अर्थ निकाला। उन्होंने कहा, “मेरे कथन को गलत तरीके से पेश किया गया है। मैंने केवल इतना कहा था कि सभी राज्यों को महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीरता से काम करना चाहिए। पश्चिम बंगाल में ऐसे अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है।”
उन्होंने कहा — “ओडिशा, मणिपुर, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं के साथ अत्याचार की घटनाएं हुई हैं, इसलिए सभी राज्यों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। बंगाल में किसी भी अपराधी को छोड़ा नहीं जाएगा।”
भाजपा ने ममता सरकार को बताया ‘तालिबानी सोच’ वाली

मुख्यमंत्री के बयान के बाद विपक्ष ने उन्हें आड़े हाथों लिया। आसनसोल दक्षिण से भाजपा विधायक और प्रदेश सचिव अग्निमित्रा पॉल ने कहा — “ममता बनर्जी रेपिस्टों को बचाने वाली सरकार चला रही हैं। वे पीड़िताओं के चरित्र पर सवाल उठाकर अपराधियों को ढाल देती हैं। यह मानसिकता तालिबान जैसी है।”
उन्होंने कहा — “सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखता है कि छात्रा शाम 7:30 से 8 बजे के बीच बाहर गई थी। मुख्यमंत्री को सच छिपाने की बजाय न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।”

घटना का विवरण — जंगल में ले जाकर की गई दरिंदगी
10 अक्टूबर की रात, दुर्गापुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा अपने मित्र के साथ भोजन के लिए बाहर गई थी। लौटते समय तीन लोगों ने रास्ता रोककर उसे जबरन बाइक पर बिठाया और पास के सुनसान इलाके में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अपराधियों ने उसका मोबाइल छीन लिया और धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
वारदात के बाद छात्रा ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर पास के थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और मोबाइल टॉवर लोकेशन की मदद से आरोपियों को चिन्हित किया। पकड़े गए सभी आरोपी पास के बिजड़ा गांव के निवासी हैं।
पीड़िता का इलाज जारी, पिता ने मांगी सुरक्षा
पीड़िता वर्तमान में स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन है और चलने-फिरने में असमर्थ है। उसके पिता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपील की है कि बेटी को ओडिशा ले जाने की अनुमति दी जाए ताकि वह वहां सुरक्षित माहौल में उपचार प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा — “राज्य प्रशासन सहयोग कर रहा है, परंतु मुझे डर है कि आरोपी पक्ष के लोग मेरी बेटी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।”
राष्ट्रीय महिला आयोग और ओडिशा सरकार ने जताई चिंता
घटना के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की टीम रविवार को दुर्गापुर पहुंची थी। वहीं, ओडिशा महिला आयोग का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पीड़िता से मिलने और जांच अधिकारियों से वार्ता करने पहुंचा। आयोग इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट ओडिशा सरकार को सौंपेगा।

जनता में आक्रोश, कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
दुर्गापुर और आसनसोल क्षेत्र में इस जघन्य अपराध को लेकर लोगों में गुस्सा है। भाजपा और महिला संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कठोर दंड की मांग की है। पुलिस का कहना है कि सभी सबूत इकट्ठे किए जा रहे हैं और आरोपियों को जल्द सजा दिलाने के लिए मजबूत चार्जशीट तैयार की जाएगी।
इस पूरे मामले ने न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था की सच्चाई उजागर की है, बल्कि सत्ता और विपक्ष दोनों के बीच महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर राजनीतिक टकराव भी पैदा कर दिया है। जनता की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि क्या राज्य सरकार इस केस को न्याय की दिशा में निर्णायक मोड़ तक पहुंचा पाएगी या नहीं।














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