विश्वास की आड़ में विश्वासघात: दोस्त ने ही बना दी दुर्गापुर की छात्रा को शिकार

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दुर्गापुर : दुर्गापुर के निजी मेडिकल कॉलेज में हुए सामूहिक बलात्कार की घटना ने पूरे बंगाल को झकझोर कर रख दिया है। यह वारदात न केवल समाज की सोच पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि दोस्ती जैसे पवित्र रिश्ते की आड़ में रचे गए विश्वासघात की भयावह तस्वीर भी सामने लाती है। डॉक्टर बनने का सपना लेकर घर से निकली एक युवती के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार हुआ, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

ओडिशा के जलेश्वर की रहने वाली 23 वर्षीय यह छात्रा एमबीबीएस की पढ़ाई करने दुर्गापुर आई थी। पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात मालदा निवासी वासिफ अली से हुई। दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। कॉलेज के छात्र-छात्राएं इन्हें हमेशा साथ देखा करते थे। लेकिन कौन जानता था कि यही दोस्ती एक दिन उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाएगी।

घटना वाले दिन यानी 10 अक्टूबर की रात वासिफ छात्रा को डिनर के बहाने कॉलेज से बाहर ले गया। कॉलेज परिसर से निकलते समय दोनों को सीसीटीवी कैमरे में शाम 7:58 बजे साथ जाते हुए देखा गया। लेकिन इसके बाद फुटेज में 8:42 बजे वासिफ अकेला लौटता दिखा। करीब आधे घंटे बाद 9:29 बजे वह फिर से छात्रा को साथ लेकर लौटता है। यही वीडियो क्लिप पुलिस की जांच में अब सबसे अहम सबूत बन चुका है।

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सूत्रों के अनुसार, वासिफ छात्रा को एक सुनसान इलाके में ले गया था, जहां सड़क पर न लाइट थी और न सीसीटीवी कैमरा। इसी जगह उसके साथ दरिंदगी हुई। घटना के बाद छात्रा गंभीर हालत में पाई गई। प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में उसके साथ बलात्कार की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि उसके शरीर पर चोटों के निशान हैं और भीषण रक्तस्राव हुआ था।

जांच अधिकारी एसआई गौतम विश्वास ने बताया कि इस मामले में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है — शेख रियाजुद्दीन उर्फ मंटू (31), फिरदौस शेख (23), अपू बाउरी (21), नसीरूद्दीन शेख उर्फ सम्राट (23), सफीक शेख (28) और वासिफ अली (26)। इनमें से चार आरोपी बी-जोन के बिजड़ा और बाउरी पाड़ा गांव के निवासी हैं।

पुलिस कमिश्नर सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि वासिफ अली की भूमिका प्रारंभ से ही संदेहास्पद थी। उसकी गतिविधियों में कई विसंगतियां मिली हैं। घटना वाले दिन उसने कॉलेज से बाहर जाने की जानकारी किसी को नहीं दी थी। पुलिस ने मंगलवार को उसे घटनास्थल पर ले जाकर रिकंस्ट्रक्शन कराया, जिसमें उसके बयान झूठे पाए गए। उसके वारदात के समय पहने कपड़े भी जब्त कर लिए गए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में से एक आरोपी कॉलेज का पूर्व सुरक्षा गार्ड बताया जा रहा है, जिसे अनुशासनहीनता के कारण पांच साल पहले नौकरी से निकाल दिया गया था। दूसरा आरोपी किसी अस्पताल में काम करता है, तीसरा नगर निगम में अस्थायी कर्मचारी है, जबकि बाकी बेरोजगार हैं। पुलिस इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।

पीड़िता के पिता ने पुलिस को दिए बयान में कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि जिस पर हमारी बेटी सबसे ज़्यादा भरोसा करती है, वही उसकी जिंदगी तबाह कर देगा।” उन्होंने कहा कि बेटी को इंसाफ मिलना ही सबसे बड़ी राहत होगी।

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है (NTS PS Case No. 131/2025 dated 11.10.2025 u/s 70(1)/3(5) of BNS 2023)। पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि वारदात की योजना किसने बनाई और किसने उसे अंजाम दिया।

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यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि समाज में महिला सुरक्षा अभी भी कितनी कमजोर है। जिस उम्र में युवतियां अपने भविष्य के सपने बुनती हैं, उसी उम्र में कुछ लोग उनके विश्वास को कुचल देते हैं।

मेडिकल कॉलेज के छात्रों में आक्रोश व्याप्त है। छात्र संगठन “वॉयस ऑफ अभया” और “वॉयस ऑफ वीमेन” ने बुधवार को कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।

जांच जारी है, लेकिन एक बात तय है— इस घटना ने इंसानियत की जड़ों को हिला दिया है। दोस्ती के पवित्र रिश्ते को जिस तरह कलंकित किया गया है, वह आने वाले समय में समाज के लिए चेतावनी है कि अंधविश्वास और अंधभरोसा, दोनों ही खतरनाक हो सकते हैं।

इस पूरे प्रकरण ने ‘संगम’ फिल्म के उस अमर गीत को एक भयावह वास्तविकता बना दिया है— “दोस्त दोस्त ना रहा…”

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