
आसनसोल : बुधवार को आसनसोल की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा, जब कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने मिलकर लोकतंत्र की पारदर्शिता की रक्षा के लिए एकजुट आवाज बुलंद की। बीएनआर मोड़ से निकली “जन आक्रोश रैली” ने शहर के हर वर्ग का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रैली का आयोजन भारतीय मुक्त मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा और बहु जन क्लांति मोर्चा की ओर से किया गया था।
सैकड़ों लोगों की भीड़ ने हाथों में बैनर और तख्तियां थामे नारे लगाए — “ईवीएम हटाओ, लोकतंत्र बचाओ”, “जनता का वोट जनता का अधिकार”, “आदिवासी सम्मान हमारा गर्व”। पूरे मार्ग में रैली ने शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई।
रैली बीएनआर मोड़ से प्रारंभ होकर जिलाशासक कार्यालय पहुंची, जहां इसे सभा में बदल दिया गया। प्रतिनिधियों ने जिलाशासक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में वोटिंग की पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आगामी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर प्रणाली को फिर से लागू किया जाए।

संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि ईवीएम मशीनों के प्रयोग से चुनावी परिणामों पर संदेह बढ़ा है। उन्होंने कहा कि “जब जनता का विश्वास मत प्रक्रिया से उठ जाता है, तब लोकतंत्र की जड़ें हिल जाती हैं। बैलेट पेपर से मतदान ही वह तरीका है जिससे हर मतदाता को पारदर्शिता और भरोसे की गारंटी मिलती है।”
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
रैली में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने आदिवासी समुदायों के मुद्दों को भी मुखरता से उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में विकास कार्यों की उपेक्षा और भूमि अधिकारों की अनदेखी लगातार बढ़ रही है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार को आदिवासियों के सम्मान, संस्कृति और जमीन की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
एक वक्ता ने कहा, “लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज का हर वर्ग, विशेषकर आदिवासी और पिछड़े समुदाय, समान अधिकार के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।”
मार्च के दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए कड़ी चौकसी बरती। बीएनआर मोड़ से लेकर जिलाशासक कार्यालय तक पूरे मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती रही।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रैली शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो वे आने वाले समय में बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ेंगे।
आसनसोल में इस रैली ने न केवल जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस को फिर से जीवंत किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जनता अब अपने वोट की पारदर्शिता और लोकतंत्र की साख को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग है।














Users Today : 21
Users Yesterday : 30