
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में अवैध बालू (रेत) खनन और उससे जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार सुबह एक और बड़ी कार्रवाई शुरू की। तड़के से ही ईडी की कई टीमें राज्यभर में सक्रिय हो गईं और कोलकाता, आसनसोल, झाड़ग्राम, लालगढ़ व गोपीबल्लभपुर सहित कुल सात स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। बताया जा रहा है कि इस रेड का सीधा संबंध रेत तस्करी और हवाला नेटवर्क से जुड़े अरबों रुपये के अवैध लेन-देन से है।
ईडी सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए काले धन को हवाला के माध्यम से विदेशों में खपाने की भी आशंका जताई जा रही है। एजेंसी के पास ऐसे कई सबूत मिले हैं जो दर्शाते हैं कि सरकारी ठेके की आड़ में रेत का अवैध कारोबार कर बड़ी मात्रा में नकदी उत्पन्न की गई और बाद में उस रकम को वैध दिखाने के लिए फर्जी कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर किया गया।

गुरुवार सुबह से आसनसोल में मुर्गाशोल वार्ड 41 स्थित रेत कारोबारी मनीष बगड़िया के आवास पर ईडी की टीम ने तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान केंद्रीय बलों ने घर को चारों ओर से घेर रखा था। सूत्रों के अनुसार, मनीष बगड़िया का नाम लंबे समय से बालू व्यापार में प्रमुख रूप से उभर कर आया है। वह बंगाल के साथ-साथ बिहार और झारखंड में भी कारोबार फैलाए हुए हैं।

इसके साथ ही, झाड़ग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर स्थित “जीडी माइनिंग कंपनी” के दफ्तर में भी ईडी ने छापा मारा। यह वही कंपनी बताई जा रही है, जिसका नाम राज्य में बड़े पैमाने पर बालू घाटों की बोली और अवैध उठाव में आया था। एजेंसी ने लालगढ़ के रेत कारोबारी सौरव रॉय और शेख जहीरुल अली के ठिकानों की भी तलाशी ली। सौरव रॉय की झाड़ग्राम और लालगढ़ क्षेत्र में कई बालू खदानें हैं। वहीं, शेख जहीरुल के गोपीबल्लभपुर-1 ब्लॉक के नयाबासन स्थित घर पर भी ईडी की टीम ने छापा मारा।

ईडी के अधिकारियों ने लालगढ़ स्थित कंसावती नदी के किनारे रेत खदानों में भी तलाशी अभियान चलाया। वहां सुबह से करीब 100 डंपर और ट्रक खड़े मिले जिन्हें रेत लोड करने से रोक दिया गया। एजेंसी ने खदान कार्यालय से बिक्री से संबंधित कंसाइनमेंट ऑर्डर (सीओ) और अन्य दस्तावेज़ जब्त किए हैं। ईडी सूत्रों का कहना है कि रेत की फर्जी खेप दिखाकर कई गुना अवैध रेत उठाव किया गया और उसी से काले धन का खेल रचा गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई रेत कारोबारी ट्रकों के एक ही नंबर का बार-बार उपयोग करके सरकारी सिस्टम को धोखा दे रहे थे। एक वाहन की अनुमति पत्र (परमिट) पर दर्ज नंबर से कई ट्रक चलाए जाते थे। इससे एक ही दिन में दर्जनों डंपरों से अवैध बालू उठाई जाती थी। एजेंसी ने इस तकनीकी धोखाधड़ी से जुड़े रिकॉर्ड भी जब्त कर लिए हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, झाड़ग्राम के लालगढ़ और गोपीबल्लभपुर क्षेत्र में यह कारोबार लंबे समय से प्रशासन की “अनदेखी” में फल-फूल रहा था। ईडी अब यह भी जांच कर रही है कि क्या स्थानीय प्रशासन या पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से यह अवैध नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। रेत उठाने के अनुमति पत्रों में दिए गए क्यूआर कोड भी कई मामलों में फर्जी पाए गए हैं।
गौरतलब है कि इसी साल 9 सितंबर को भी ईडी ने राज्यभर में बालू तस्करी से जुड़े मामलों में छापेमारी की थी। उस समय मिदनापुर और गोपीबल्लभपुर से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद की गई थी। झाड़ग्राम के कारोबारी सौरव रॉय के घर से लगभग 65 लाख रुपये और शेख जहीरुल अली के आवास से 25 लाख रुपये मिले थे। गुरुवार की रेड को उसी जांच श्रृंखला का अगला चरण माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई के मायने निकाले जा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने पहले भी आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले ईडी और सीबीआई को सक्रिय कर केंद्र सरकार विपक्षी दलों पर दबाव बनाने का प्रयास करती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इन एजेंसियों की छापेमारी का मकसद केवल राजनीतिक रूप से बदनाम करना है।

हालांकि, ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई अदालत के आदेश और पहले से चल रही जांच के आधार पर की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हम केवल मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध से जुड़े साक्ष्य जुटा रहे हैं, राजनीति से इसका कोई लेना-देना नहीं है।”
कुल मिलाकर, ईडी की इस ताजा छापेमारी ने पश्चिम बंगाल के रेत कारोबार जगत में हड़कंप मचा दिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कारोबार से जुड़े कई नाम अब एजेंसी की जांच के घेरे में हैं। आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।














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