
नियामतपुर : आसनसोल नगर निगम क्षेत्र में एक बार फिर पार्किंग सिंडिकेट का खेल सामने आया है। नगर निगम की भूमि से जहां कभी हर वर्ष लाखों रुपये की आमदनी होती थी, वहीं अब निगम के खाते में एक पैसा भी नहीं आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस संस्था को निगम ने सरकारी शुल्क नहीं देने के कारण ब्लैकलिस्ट कर दिया था, वही संस्था अब आसनसोल माइंस बोर्ड की जमीन पर धड़ल्ले से पार्किंग का संचालन कर रही है।यह मामला सामने आने के बाद आइएनटीटीयूसी के ब्लॉक अध्यक्ष राजू अहलूवालिया ने माइंस बोर्ड के चेयरमैन को पत्र लिखकर पूरी जांच की मांग की है। अहलूवालिया ने आरोप लगाया है कि मां काली ट्रांसपोर्ट नामक संस्था को वर्ष 2024 में ही सात वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था, क्योंकि उसने निगम को बकाया सरकारी शुल्क नहीं चुकाया था। बावजूद इसके, आज वही संस्था लच्छीपुर कुष्ठ पल्लि स्थित माइंस बोर्ड की जमीन पर पार्किंग चला रही है।
“कौन दे रहा है संरक्षण?”
राजू अहलूवालिया ने सवाल उठाया —“जब नगर निगम ने इस संस्था को प्रतिबंधित कर दिया है, तो फिर यह पार्किंग कौन चला रहा है? और किसने इसकी अनुमति दी?”उन्होंने कहा कि यह सीधा भ्रष्टाचार और मिलीभगत का मामला है। माइंस बोर्ड और नगर निगम दोनों को इस पर जवाब देना होगा।

कभी लाखों की आमदनी, अब एक रुपया भी नहीं
पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी के कार्यकाल में लच्छीपुर पार्किंग से नगर निगम को हर वर्ष लाखों रुपये की आय होती थी। 2021 तक निगम के खाते में पार्किंग शुल्क के रूप में नियमित राशि जमा होती रही। लेकिन इसके बाद अचानक यह पार्किंग निजी सिंडिकेट के कब्जे में चली गई।अब स्थिति यह है कि नगर निगम ने तो यहां पार्किंग संचालन औपचारिक रूप से बंद कर दिया, लेकिन निगम का बोर्ड अब भी लगा हुआ है। इसी बोर्ड का फायदा उठाकर कुछ लोग यह दिखाते हैं कि पार्किंग निगम की है, जबकि असल में उसकी हर महीने लाखों रुपये की उगाही और बंदरबांट हो रही है।
माइंस बोर्ड की जमीन पर अवैध कब्जा
सूत्रों के अनुसार, जिस जमीन पर फिलहाल पार्किंग का संचालन हो रहा है, वह ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के अधीन माइंस बोर्ड की है। नगर निगम ने इस जमीन को वापस लेने के लिए कई बार पत्र लिखा, लेकिन प्रशासनिक पेच के कारण मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। इस बीच पार्किंग सिंडिकेट की चांदी कट रही है।स्थानीय निवासियों ने बताया कि प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक, ऑटो और निजी वाहन वहां खड़े रहते हैं। पार्किंग शुल्क 50 से 200 रुपये तक वसूला जा रहा है। इस वसूली की कोई रसीद नहीं दी जाती।

जनता और पार्षदों में आक्रोश
नगर निगम के कुछ पार्षदों ने भी इस मामले में नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि निगम की संपत्ति से किसी निजी समूह का फायदा होना जनहित के खिलाफ और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। कई पार्षदों ने जल्द जांच शुरू करने की मांग की है।
कार्रवाई की मांग
राजू अहलूवालिया ने कहा —“माइंस बोर्ड को तुरंत इस जमीन से अवैध पार्किंग हटानी चाहिए और ब्लैकलिस्टेड संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर प्रशासन ने कदम नहीं उठाया, तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।”फिलहाल नगर निगम और माइंस बोर्ड दोनों ही चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन इलाके में यह चर्चा जोरों पर है कि लच्छीपुर की यह पार्किंग केवल भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत से ही चल रही है।














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