
आसनसोल : पश्चिम बर्धमान जिले के कुलटी क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने एक विशेष “विजया सम्मेलन” का आयोजन किया। इस अवसर पर जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले कुछ महीने संगठन के लिए बेहद निर्णायक होंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “टीएमसी का भविष्य हमारे सामूहिक प्रयास पर निर्भर करता है, इसलिए हर कार्यकर्ता को अब मैदान में उतरकर जी-जान से मेहनत करनी होगी।”
सभा के दौरान चक्रवर्ती ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कसम दिलाते हुए कहा कि “अब वक्त है कि हम सब व्यक्तिगत स्वार्थ और गुटबाजी को छोड़कर केवल पार्टी और जनता के हित के लिए काम करें।” उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि जो लोग केवल नाम के लिए पार्टी में हैं या संगठन की गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने कहा कि कुलटी विधानसभा क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है और आगामी चुनाव में यहां टीएमसी की जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी आवश्यक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि “लोगों के घर-घर जाएं, ममता बनर्जी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को बताएं, क्योंकि जनता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”
हालांकि नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के भाषण के एक हिस्से ने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “मैं यहां पाण्डवेश्वर से वसूली करने नहीं आया हूँ, मैं संगठन को मजबूत करने आया हूँ।” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
इस टिप्पणी पर भाजपा नेता और पाण्डवेश्वर के पूर्व विधायक जितेंद्र तिवारी ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “अब टीएमसी नेताओं को अपने ही कार्यकर्ताओं को ममता बनर्जी के नाम की कसम दिलानी पड़ रही है, इससे साफ है कि पार्टी में अनुशासन और एकता की कमी है।”

तिवारी ने आगे कहा कि “नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती का यह कहना कि वह कुलटी वसूली करने नहीं आए हैं, एक तरह से उनकी पार्टी की सच्चाई को ही उजागर करता है। वास्तव में उन्हें कुलटी आने की जरूरत नहीं, क्योंकि पाण्डवेश्वर से ही उनकी पर्याप्त वसूली हो जाती है।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “जिस दल में ऐसे नेता हों जो खुद सफाई देने पर मजबूर हों, उस दल की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती का यह बयान न केवल विपक्ष के लिए हथियार बन गया है, बल्कि टीएमसी के अंदर चल रही गुटबाजी को भी उजागर करता है। पिछले कुछ महीनों में कुलटी और पाण्डवेश्वर क्षेत्र में टीएमसी की स्थानीय इकाइयों में मतभेद की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। इस सम्मेलन को इन मतभेदों को मिटाने का प्रयास माना जा रहा था, लेकिन बयानबाजी ने हालात और उलझा दिए।
विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी पहले टीएमसी में ही थे, इसलिए पार्टी की आंतरिक स्थिति से भलीभांति परिचित हैं। उनका यह पलटवार टीएमसी के भीतर पुराने घावों को फिर से कुरेदने वाला साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, कुलटी का यह विजया सम्मेलन संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन अब यह कार्यक्रम राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का मंच बन गया। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी को एकजुटता दिखाने की जरूरत है, क्योंकि भाजपा हर मौके का राजनीतिक लाभ उठाने में पीछे नहीं है।
राजनीतिक माहौल को देखकर यह साफ है कि पश्चिम बर्धमान में आने वाले महीनों में टीएमसी और भाजपा के बीच जंग और भी तीव्र होगी। जनता अब देख रही है कि कौन पार्टी विकास की राजनीति करेगा और कौन केवल आरोपों की बौछार में चुनाव लड़ना चाहता है।














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