
आसनसोल : पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले ही माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज़ होता जा रहा है। हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांतो मजूमदार के एक बयान ने इस राजनीतिक टकराव को और भड़का दिया है, जिस पर टीएमसी के वरिष्ठ नेता वी. शिवदासन दासु ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
उत्तर बंगाल में आयोजित एक जनसभा में बोलते हुए डॉ. सुकांतो मजूमदार ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता अब पूरी तरह संगठित हैं और “जब चाहें तब टीएमसी को हराने की ताकत रखते हैं।” उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में टीएमसी के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। डॉ. मजूमदार ने यह भी दावा किया कि उत्तर बंगाल में भाजपा की जड़ें पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी हैं और जनता अब “परिवर्तन की प्रतीक्षा में है।”
भाजपा नेता के इस बयान पर टीएमसी ने तीखा पलटवार किया। प्रदेश सचिव वी. शिवदासन दासु ने कहा कि “डॉ. मजूमदार एक शिक्षित व्यक्ति हैं, लेकिन उनके बयान से ऐसा लगता है कि वे उकसावे की राजनीति करना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि “जो लोग अपने क्षेत्र में संगठन नहीं संभाल पा रहे, वे अब पूरे राज्य को धमकाने की बातें कर रहे हैं।”

दासु ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल में हिंसा फैलाकर चुनावी माहौल को बिगाड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि “ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल आज विकास और शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन भाजपा को यह पसंद नहीं आ रहा।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर भाजपा कार्यकर्ता किसी तरह की गुंडागर्दी करेंगे, तो टीएमसी कार्यकर्ता भी चुप नहीं बैठेंगे।”
टीएमसी नेता ने दावा किया कि राज्य की जनता पूरी तरह ममता बनर्जी के साथ है और 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर भारी बहुमत से सत्ता में लौटेगी। उन्होंने कहा कि “भाजपा की राजनीति केवल बयानबाजी और डर फैलाने तक सीमित है, जबकि टीएमसी जमीनी स्तर पर जनता के साथ खड़ी है।”
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयानबाजी से यह साफ हो गया है कि राज्य की राजनीति धीरे-धीरे चुनावी मोड में आ चुकी है। दोनों ही पार्टियाँ अपने-अपने समर्थक वर्ग को साधने की कोशिश कर रही हैं और आने वाले महीनों में ऐसे बयानों की तीव्रता और बढ़ने की संभावना है।

वहीं आम जनता का कहना है कि राजनीतिक दलों को एक-दूसरे को धमकाने के बजाय विकास और जनसमस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। राज्य में बेरोज़गारी, कानून-व्यवस्था और उद्योग जैसे मुद्दों पर जनता ठोस पहल की उम्मीद कर रही है।
राजनीतिक पंडितों का यह भी मानना है कि सुकांतो मजूमदार का यह बयान भाजपा की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी उत्तरी बंगाल में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है। वहीं टीएमसी इसे उकसावे की राजनीति बताकर जनता की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश में है।
इन बयानों ने यह तो तय कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में भले समय बाकी हो, पर बंगाल की राजनीति में जंग अब ज़ुबानी नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी तेज़ होती जा रही है।














Users Today : 20
Users Yesterday : 30