
दुर्गापुर : चर्चित दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज छात्रा दुष्कर्म मामले में मंगलवार को नई कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। मामले के दो प्रमुख आरोपियों—शेख रियाज़उद्दीन और शफीक शेख—को गोपनीय बयान दर्ज कराने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच दुर्गापुर महकमा अदालत लाया गया। न्यायालय परिसर में पुलिस की सख्त निगरानी के बीच यह कार्रवाई लगभग दो घंटे तक चली।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपी पहले से ही जेल हिरासत में थे। मंगलवार को उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहाँ उनके गोपनीय बयान दर्ज किए गए। अदालत ने प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को पुनः न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अधिकारियों ने बताया कि यह बयान इस बहुचर्चित मामले की जाँच दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

जाँच टीम के मुताबिक, इस प्रकरण में कुल छह आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से दो आरोपियों के बयान मंगलवार को दर्ज हुए, जबकि शेष चार को बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल के आधार पर घटनाक्रम की सटीक कड़ियाँ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
मामले की गहराई से जाँच कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब तक के साक्ष्य बताते हैं कि छात्रा और मुख्य आरोपी वासिफ अली के बीच पहले से जान-पहचान थी। पुलिस को दोनों के बीच कई बार बातचीत और मुलाकात के सबूत मिले हैं। हालाँकि, जांच टीम इस बिंदु पर भी विचार कर रही है कि क्या यह रिश्ता स्वेच्छा पर आधारित था या किसी दबाव में कुछ हुआ।

गौरतलब है कि 10 अक्टूबर की शाम ओडिशा निवासी पीड़ित छात्रा, जो एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा है, अपने सहपाठी वासिफ अली के साथ हॉस्टल से बाहर निकली थी। देर रात छात्रा के लापता होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि पास के ही एक सुनसान क्षेत्र में उसके साथ दुष्कर्म हुआ है।
प्रारंभिक जांच में छात्रा ने पुलिस को दिए बयान में दावा किया था कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस आरोप के बाद पुलिस ने पाँच युवकों को तत्काल गिरफ्तार किया था। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि छात्रा के साथ शारीरिक संबंध एक ही व्यक्ति ने बनाए थे।
तकनीकी जांच में यह भी सामने आया कि घटना के पहले छात्रा और मुख्य आरोपी के बीच लगातार फोन कॉल और चैट होती रही थी। इस आधार पर पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मुलाकात पहले से तय थी या परिस्थिति अचानक बनी।
मामले को लेकर शहर में गुस्सा और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। छात्र संगठनों ने कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि महिला संगठनों ने मांग की है कि अभियुक्तों को सख्त सजा दी जाए। इसी बीच, राज्य सरकार ने भी इस मामले की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की है।

दुर्गापुर पुलिस ने बताया कि अदालत के निर्देशानुसार अब मामले की हर सुनवाई में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएँगे। अदालत परिसर में मंगलवार को भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो।
वहीं, चिकित्सा समुदाय और आम लोगों में इस घटना को लेकर गहरी चिंता है। कई डॉक्टरों और छात्रों ने कहा कि यह घटना राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। कॉलेज के कई प्रोफेसरों ने कहा कि “यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि नैतिक पतन का भी उदाहरण है।”
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को जब सभी छह आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा, तब अभियोजन पक्ष मजिस्ट्रेट के समक्ष नए साक्ष्य और बयान प्रस्तुत करेगा। यह उम्मीद की जा रही है कि इस दिन कोर्ट में केस की दिशा को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।














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