
आसनसोल : आसनसोल दक्षिण की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल ने गुरुवार को एवलिन लॉज स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने रेल पार क्षेत्र में लगभग 350 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले पर कहा कि “ममता बनर्जी के शासनकाल में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं रह गई है। हर घोटाले के पीछे टीएमसी नेताओं या उनके परिवार के सदस्यों का नाम जुड़ा मिल जाता है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है।”अग्निमित्रा पाल ने कहा कि “जब तक दोषियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा, तब तक बंगाल में ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। यहां कानून नहीं, बल्कि पार्टी का प्रभाव चलता है। आम जनता का पैसा खुलेआम लूटा जा रहा है और पुलिस कुछ करने की स्थिति में नहीं है। अगर किसी भाजपा कार्यकर्ता का नाम ज़रा सा भी आता, तो रातों-रात गिरफ्तारी हो जाती। लेकिन जब बात तृणमूल के करीबी लोगों की आती है, तो प्रशासन चुप हो जाता है।”

टीएमसी ने किया पलटवार, कहा— अपराधी का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं
भाजपा विधायक के आरोपों पर पलटवार करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया। इसमें तृणमूल ब्लॉक अध्यक्ष अनिमेष दास और पश्चिम बर्धमान जिला तृणमूल माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष सैयद महफूजुल हसन मोनू ने कहा कि “यह पूरा मामला एक व्यक्तिगत आपराधिक प्रकरण है, और इसे पार्टी से जोड़ना पूरी तरह से भ्रामक है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन तहसीन अहमद पर 350 करोड़ रुपये गबन का आरोप लगा है, उनके पिता मास्टर शकील कभी तृणमूल माइनॉरिटी सेल के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे, लेकिन अब वे पार्टी का हिस्सा नहीं हैं। मोनू ने कहा, “19 अक्टूबर को घोषित नई कमेटी में मास्टर शकील का नाम शामिल नहीं था। इस मामले के सामने आने के बाद पार्टी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस व्यक्ति का तृणमूल कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है।”
‘ममता सरकार कानून के प्रति प्रतिबद्ध’ — टीएमसी
तृणमूल नेताओं ने कहा कि जैसे ही मंत्री मलय घटक को इस प्रकरण की जानकारी मिली, उन्होंने स्वयं पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें कानून का सहारा लेने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार पूरी कोशिश करेगी कि पीड़ितों को न्याय और उनका धन वापस मिल सके। तृणमूल नेताओं ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है, ताकि जनता का ध्यान राज्य की विकास योजनाओं से हटाया जा सके।

राजनीतिक टकराव तेज
राज्य की राजनीति में यह मामला नया मोड़ लेकर आया है। भाजपा इसे “टीएमसी राज की सड़ांध” बता रही है, जबकि तृणमूल इसे “झूठे प्रचार की राजनीति” करार दे रही है। आसनसोल सहित पूरे जिलाभर में यह मुद्दा अब चर्चा का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय गबन का मामला सामने आने के बाद जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस 350 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ाता है — क्या सच्चाई सामने आएगी या यह भी बंगाल की राजनीति के शोर में कहीं दबकर रह जाएगा।














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