
आसनसोल : छठ पर्व के अवसर पर आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला, जब आसनसोल चौरासिया सोसाइटी की ओर से बर्धमान भवन परिसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर लगभग पाँच सौ छठ व्रतियों को साड़ी और पूजन सामग्री भेंट की गई। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावनाओं को नई ऊँचाई दी, बल्कि सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दिया।
चौरासिया सोसाइटी के इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएँ और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और छठ गीतों की मधुर धुनों से हुई। व्रतियों के चेहरों पर उत्साह और श्रद्धा का भाव स्पष्ट झलक रहा था। मंच से समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि छठ महापर्व हमारी भारतीय संस्कृति का ऐसा त्योहार है जो प्रकृति, स्वच्छता और अनुशासन के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भगवान चौरासिया, राजेश चौरासिया, ब्रीजकिशोर चौरासिया, गौतम दास चौरासिया और रमेश्वर चौरासिया उपस्थित रहे। उन्होंने सामूहिक रूप से व्रतियों को साड़ी भेंट करते हुए कहा कि छठ केवल सूर्य उपासना का पर्व नहीं, बल्कि यह समाज में समानता और सामूहिकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर वर्ग, हर समुदाय के लोग इस पर्व में शामिल होकर ‘एकता में शक्ति’ का सन्देश देते हैं।

भगवान चौरासिया ने अपने संबोधन में कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में सहयोग और परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव फैलाना है। जब समाज के लोग एक साथ किसी उत्सव में जुड़ते हैं, तो वह केवल पूजा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकजुटता का उत्सव बन जाता है।”
इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति हुई, जिसमें बच्चों और महिलाओं ने पारंपरिक छठ गीतों और लोक नृत्यों से सबका मन मोह लिया। पूरे हॉल में भक्तिरस और उल्लास का वातावरण व्याप्त था।

संगठन के सदस्यों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सद्भाव और पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन और व्यापक स्तर पर किए जाएंगे, ताकि समाज के हर वर्ग को इसमें भागीदारी का अवसर मिल सके।
स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि चौरासिया सोसाइटी हर वर्ष धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश देती है। बराकर निवासी मीनाक्षी देवी ने कहा, “ऐसे आयोजन हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं। जब समाज के लोग मिलकर किसी पर्व को मनाते हैं, तो वह श्रद्धा के साथ-साथ एकता का उत्सव बन जाता है।”
छठ पर्व के आगमन से पहले इस तरह के आयोजनों ने आसनसोल के सांस्कृतिक वातावरण में नई ऊर्जा का संचार किया है। समाजसेवी संगठनों की इस भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि आस्था और सेवा जब साथ चलें, तो समाज में सद्भाव और उत्सव दोनों का विस्तार होता है।














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