
बराकर : पिंजरापोल गौधाम परिसर में गोपाष्टमी पर्व पर भक्ति और सांस्कृतिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। चार दशक से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी समाज के विभिन्न वर्गों ने सम्मिलित होकर गौ-पूजन एवं शोभायात्रा का भव्य आयोजन किया। सुबह से ही शहर में धार्मिक उत्साह और उत्सव का माहौल नजर आया।
मारवाड़ी पंचायती ठाकुरबाड़ी से वैदिक मंत्रोच्चार, बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच शोभायात्रा आरंभ हुई। मार्ग में पड़ने वाले चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। “गोमाता की जय” और “धर्म की जय” के जयकारों से संपूर्ण बाजार क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। स्थान-स्थान पर महिलाओं और युवाओं ने कलश व ध्वज लेकर शोभायात्रा में सहभागिता दर्ज कराई।शोभायात्रा पिंजरापोल गौधाम पहुंचने के पश्चात विधिवत गौ-पूजन एवं आरती सम्पन्न की गई। मुख्य यजमानों ने परंपरागत विधि के साथ गोमाता का अभिषेक किया और गौ-सेवा के संकल्प को पुनः दोहराया। कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रबुद्धजन और गौशाला समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि गोपाष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संवेदना, संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

पिंजरापोल सोसाइटी के अध्यक्ष शिवकुमार अग्रवाल ने बताया कि बराकर में यह उत्सव वर्षों से सामाजिक सद्भाव का माध्यम बना हुआ है। उन्होंने कहा कि गौ-सेवा का अर्थ केवल भोजन प्रदान करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाना भी है। सचिव अर्जुन अग्रवाल ने कहा कि इस परंपरा ने बराकर को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया है और युवाओं में भी सेवा भावना प्रबल हुई है।संध्या काल में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में वृंदावन से पधारे संत श्री अनन्ताचार्यजी महाराज ने सत्संग के माध्यम से धर्म, सेवा और अहिंसा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज तभी उन्नत होता है जब उसके केंद्र में करुणा और मातृत्व भाव मौजूद हो।

धर्मसभा के दौरान एकत्रित भक्तजनों ने संत के उपदेशों को आत्मसात कर जीवन में सेवा पथ को अपनाने का संकल्प लिया।इस पूरे आयोजन में बराकर स्टेशन रोड, बेगुनिया बाजार और नदी तट क्षेत्र श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बुजुर्ग और युवा पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। स्वयंसेवकों द्वारा प्रसाद वितरण और व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने की सराहनीय पहल दिखाई दी। बच्चों के उत्साह और युवाओं की सक्रियता ने आयोजन को और जीवंतता प्रदान की।गौ-पूजा के पश्चात आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया। आयोजन समिति की ओर से उपस्थित नागरिकों का आभार प्रकट किया गया और भविष्य में इसी समरसता व धार्मिक भावना के साथ उत्सव को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी गई।इस अवसर पर अनेक गणमान्य उपस्थित रहे और सभी ने गौ-सेवा की निरंतरता एवं समाज में करुणा और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। बराकर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि धार्मिक परंपराएँ न केवल आस्था का आधार हैं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की धुरी भी हैं।














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