
आसनसोल : शुक्रवार को हटन रोड के समीप स्थित 13 नंबर पार्किंग स्थल पर नगर निगम द्वारा टोटो और ऑटो स्टैंड निर्धारण को लेकर बैनर लगाए जाने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहरा गया। बैनर लगते ही स्थानीय परिवहन प्रतिनिधियों और श्रमिक संगठनों में नाराजगी फैल गई। उनका आरोप है कि यह ज़मीन रेलवे की है और नगर निगम को इसे पार्किंग घोषित करने का अधिकार नहीं है। इस मुद्दे ने शहर में शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
शुक्रवार सुबह आईएनटीटीयूसी नेता राजू अहलूवालिया अपने समर्थकों के साथ स्थल पर पहुँचे और स्पष्ट कहा कि 13 नंबर पार्किंग क्षेत्र पिछले लगभग 45 वर्षों से ऑटो चालकों के लिए निशुल्क स्टैंड के रूप में उपयोग होता आया है। उन्होंने कहा कि अचानक नगर निगम द्वारा बिना अनुमति और दावा स्पष्ट किए सार्वजनिक स्थल पर ऑटो और टोटो स्टैंड का बैनर लगाना असंवैधानिक और प्रशासनिक अतिक्रमण जैसा प्रतीत होता है। अहलूवालिया ने आरोप लगाया कि यह प्रयास कुछ निजी हितों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे भविष्य में शुल्क लेकर वाहन खड़ा कराने की व्यवस्था लागू की जा सके।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हुआ है और उनकी सरकार किसी भी अनियमित कदम को सहन नहीं करती। ऐसे में स्थानीय निकाय का यह निर्णय समझ से परे है और यह शासन के निर्देशों के विपरीत नजर आता है। अहलूवालिया ने यह भी दावा किया कि मामला न्यायालय में लंबित है, और कानूनी स्थिति स्पष्ट होने से पूर्व नगर निगम किसी प्रकार का प्रशासनिक आदेश कैसे जारी कर सकता है।
नेता ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी जनप्रतिनिधि को तानाशाही तरीके से फैसला लेने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेयर द्वारा निजी पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने और राजस्व संग्रह का मार्ग बनाने के उद्देश्य से यह योजना आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो परिवहन संगठन एवं स्थानीय जनसंगठन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
वहीं दूसरी ओर नगर निगम सूत्रों से मिली गैर-आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बढ़ती सर्वजनिक परिवहन भीड़ को नियंत्रित करने और शहर में ट्रैफिक प्रबंधन सुधरने के उद्देश्य से यह स्थान निर्धारित किया गया है। हालांकि, आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। निगम अधिकारियों ने केवल इतना कहा है कि शहर में सुव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था विकसित करना निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसी दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का मत भी इस विषय पर बँटा हुआ है। कुछ लोगों का कहना है कि नियोजित पार्किंग से क्षेत्र में अव्यवस्था कम होगी और सड़क पर वाहनों की भीड़ नियंत्रित होगी। वहीं दूसरी तरफ, ऑटो चालकों का कहना है कि अचानक निर्णय से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि वर्षों से वे इस क्षेत्र को प्राथमिक ऑटो स्टैंड के रूप में उपयोग करते आए हैं।
मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों रूपों में चर्चा का केंद्र बन गया है। नगर निगम प्रशासन से अपेक्षा है कि वह स्पष्ट तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय ले और आम नागरिकों तथा परिवहन श्रमिकों की सुविधा को प्राथमिकता दे। वहीं ऑटो-टोटो चालकों ने साफ कहा है कि न्यायालय का फैसला आने तक वे इस स्थान को छोड़कर नहीं जाएँगे। शहरवासी इस विवाद के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन वार्ता के माध्यम से समाधान निकालते हुए अनावश्यक टकराव से बचाएगा।














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