आसामसोल/चित्तरंजन : चित्तरंजन रेलवे कॉलोनी में मंगलवार सुबह प्रशासनिक हलचल उस समय तेज हो गई, जब रेलवे अधिकारियों की टीम अचानक कॉलोनी के विभिन्न हिस्सों में पहुँची और लंबे समय से विवादों में घिरे 16 अनधिकृत क्लबों को हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी। भारी संख्या में तैनात आरपीएफ जवानों व दो जेसीबी मशीनों के साथ शुरू हुई इस मुहिम ने इलाके में एक अलग तरह का माहौल बना दिया। लोग घरों से बाहर निकल आए—कहीं खामोशी, कहीं चर्चा, तो कहीं प्रशासनिक कदमों को लेकर नाराजगी भी स्पष्ट दिखाई दी।

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन क्लबों को पिछले कई महीनों से नियमों का उल्लंघन करते पाया जा रहा था। रेलवे की जमीन पर बने ये क्लब न केवल अनधिकृत थे बल्कि इनसे संबंधित शिकायतें लगातार मुख्यालय तक पहुँच रही थीं। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ क्लबों में देर रात तक संदिग्ध गतिविधियाँ होती थीं, जिसके कारण कई बार स्थानीय लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी आधार पर कार्रवाई को आवश्यक माना गया।
प्रशासन ने बताया कि क्लब संचालकों को पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था। नोटिस में यह स्पष्ट कहा गया था कि निर्धारित अवधि में स्थल खाली कर दिया जाए, अन्यथा रेलवे अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा। चूँकि समय सीमा समाप्त हो चुकी थी, मंगलवार को कार्रवाई तय समय पर आरंभ की गई। सुबह करीब साढ़े आठ बजे जेसीबी मशीनें जैसे ही कॉलोनी के प्रथम ब्लॉक में पहुँचीं, क्लबों के बाहर मौजूद लोगों में अचानक हलचल फैल गई। कुछ सदस्य दस्तावेज़ दिखाकर कार्यवाही रोकने की अपील करते रहे, लेकिन अधिकारियों ने साफ कर दिया कि आदेश उच्च स्तर से जारी है और इसे बदला नहीं जा सकता।

कार्रवाई के दौरान आरपीएफ अधिकारी सोमनाथ चक्रवर्ती भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि रेलवे संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण दीर्घकालिक समस्या बन सकता है, इसलिए प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाता है। इस बार जिन 16 क्लबों को हटाया गया है, वे सभी पूरी तरह अनधिकृत पाए गए थे और इनमें से कई ने वर्षों से भूमि पर कब्ज़ा कर रखा था। उन्होंने कहा, “रेलवे की भूमि सार्वजनिक संपत्ति है। इसे निजी उपयोग या अवैध गतिविधियों के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।”
इधर, स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया दो धड़ों में बंटी हुई नज़र आई। कुछ लोगों ने कहा कि प्रशासन ने “देर से सही लेकिन सही कदम” उठाया है। उनका कहना था कि क्लब गतिविधियों के नाम पर कई बार असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता था, जिससे माहौल प्रभावित होता था। वहीं क्लब सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका कहना था कि कई क्लब वर्षों से सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं और अचानक उन्हें तोड़ देना उचित नहीं है। कुछ सदस्य तो यह तक कहते दिखाई दिए कि यदि उन्हें एक और मौका दिया जाता, तो वे स्वयं परिसर खाली कर देते।
इसके बावजूद कार्यवाही बिना किसी रुकावट के चलती रही। जेसीबी मशीनों के एक-एक करके ढांचों को तोड़ने के साथ ही बैरिकेडिंग भी की गई ताकि कोई व्यक्ति बीच में हस्तक्षेप न कर सके। दोपहर तक लगभग 12 क्लबों को हटाया जा चुका था, जबकि शेष चार को शाम तक हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। अधिकारियों ने बताया कि आज ही अभियान समाप्त कर कॉलोनी क्षेत्र को पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा।

रेलवे विभाग का कहना है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में नियोजित ढंग से विकासात्मक कार्य किए जाएँगे, ताकि कॉलोनी में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर बनाई जा सके। इस कार्रवाई को रेलवे की ‘अतिक्रमण मुक्त अभियान’ की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि कॉलोनी में भविष्य में किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण होने पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। रेलवे अधिकारियों ने निवासियों को अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या या शिकायत होने पर सीधे उन्हें सूचित किया जाए, ताकि अवैध गतिविधियों को जड़ से रोका जा सके।
मंगलवार की सुबह शुरू हुआ यह अभियान देर शाम तक चर्चा का विषय बना रहा। कई स्थानों पर लोग समूह बनाकर इस कार्रवाई पर अपने-अपने विचार रखते दिखे। कुछ लोग इसे व्यवस्था सुधारने का कदम मानते रहे, तो कुछ को लगा कि प्रशासनिक सख्ती थोड़ी नरम हो सकती थी। फिर भी, रेलवे का रुख साफ है—“रेलवे भूमि पर अतिक्रमण अब किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होगा।”














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