चित्तरंजन में निवास प्रमाण पत्र को लेकर बढ़ी परेशानी, समाधान की मांग

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चित्तरंजन :  रेलवे टाउन में निवास करने वाले हजारों परिवारों के लिए निवास प्रमाण पत्र (रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट) प्राप्त करना एक जटिल और कष्टप्रद प्रक्रिया बन चुका है। शुक्रवार को इस प्रकरण ने नया मोड़ लिया, जब चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस ने प्रशासनिक अव्यवस्था और प्रक्रियागत उलझनों को लेकर अधिकारियों को पत्र लिखकर शीघ्र समाधान की मांग की। यूनियन के महासचिव इंद्रजीत सिंह द्वारा भेजे गए इस पत्र में निवासियों की तकलीफों का विस्तार से उल्लेख किया गया है और संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की अपील की गई है।

जानकारी के अनुसार, चित्तरंजन रेलवे टाउन के लोगों को वर्षों से डोमिसाइल एवं निवास प्रमाण पत्र हेतु करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित सबडिविजन कार्यालय जाना पड़ता था। इस दूरी और जटिल प्रक्रिया के कारण नागरिकों को भारी असुविधा होती थी। मामले की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सलानपुर विकास खंड के बीडीओ इस प्रमाण पत्र को जारी करेंगे। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने कई बार प्रयास भी किए।

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नियम तय होने के बाद भी प्रक्रिया में जटिलता बनी हुई है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, आवेदन के साथ वाइस वार्डन द्वारा जारी अस्थाई आवास प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है, जिस पर वार्डन या सहायक वार्डन का प्रत्याक्षर होना भी आवश्यक है। परंतु यूनियन का आरोप है कि रेलवे प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देशों के अभाव में कई मामलों में वार्डन अथवा सहायक वार्डन काउंटर-साइन करने से बच रहे हैं। इससे बीडीओ कार्यालय आवेदनों को सीधे स्वीकार नहीं कर पा रहा।

यूनियन ने कहा कि हालाँकि वाइस वार्डन और बीडीओ कार्यालय की ओर से सहयोगपूर्ण रुख दिखाया जा रहा है, किंतु वार्डन स्तर पर मिल रहे असहयोग ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इंद्रजीत सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि निवास प्रमाण पत्र नौकरी, उच्च शिक्षा, सरकारी योजनाओं के लाभ और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अत्यावश्यक दस्तावेज है। ऐसे में यदि स्थानीय अधिकारी ही सहयोग न करें तो नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इस विषय पर सलानपुर बीडीओ देबांजन बिस्वास ने स्पष्ट किया है कि बिना काउंटर-साइन वाले प्रमाण पत्र की स्थिति में दस्तावेज़ और निवास स्थान का सत्यापन बीडीओ कार्यालय द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि “किसी भी आवेदक को वापस नहीं भेजा जाता। हाँ, प्रक्रिया में समय अवश्य लगता है, लेकिन सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है।”

इसी बीच, निवासी यह भी शिकायत कर रहे हैं कि सत्यापन प्रक्रिया में विलंब होने से सरकारी नौकरियों के आवेदन, छात्रवृत्ति और प्रवेश जैसी समयबद्ध आवश्यकताएँ प्रभावित होती हैं। एक कर्मचारी ने कहा, “सरकारी सुविधा लेने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि प्रक्रिया सरल हो जाए तो पूरे नगर को राहत मिलेगी।”

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रेलवे नगर में रहने वाले नागरिकों का मत है कि यदि रेलवे प्रशासन वार्डन और सहायक वार्डन को स्पष्ट निर्देश जारी कर दे तो समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। वहीं सामाजिक संगठनों का कहना है कि लोगों को दस्तावेज़ों की पूर्ति के लिए बार-बार दौड़ना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और प्रशासन को इसे प्राथमिकता से हल करना चाहिए।

मामले के उछलने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि रेलवे प्रशासन और स्थानीय सिविल प्रशासन संयुक्त बैठक कर प्रक्रिया को सरल बनाएंगे। निवासियों का मानना है कि पारदर्शी और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाएँ ताकि किसी भी अधिकारी के विवेकाधीन निर्णय से आवेदक परेशान न हों।

फिलहाल, नगरवासी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं और आशा कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में दस्तावेज़ प्राप्ति की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल और सुगम हो सकेगी।

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