
पूर्व बर्दवान : जिले के पूर्वस्थली-2 ब्लॉक में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब ग्रामीणों ने एक तालाब किनारे से भारी मात्रा में पहचान पत्रों का जखीरा बरामद किया। स्थानीय लोगों द्वारा जलकुंभी साफ करते हुए बोरी मिलने और उसमें से हजारों पहचान दस्तावेज निकलने की जानकारी सामने आते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्यभर में जनगणना-संबंधी दस्तावेजों का वितरण चल रहा है, जिससे मामले को लेकर कई तरह की आशंकाएं उभर आई हैं।

घटना पीला पंचायत के ललितपुर गांव की है। ग्रामीण सुबह की तरह तालाब के आसपास सफाई कार्य में जुटे हुए थे कि तभी एक बोरी उनकी नजर में आई। बोरी को खोलते ही लोगों के होश उड़ गए, क्योंकि उसके भीतर बड़ी संख्या में पहचान पत्र—जिनमें आधार कार्ड जैसे दस्तावेज अधिक थे—मौजूद थे। स्थानीय लोगों के अनुसार इनमें अधिकतर कार्ड आसपास के हामिदपुर और पीला क्षेत्र के निवासियों के हैं।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दस्तावेजों को कब्जे में लेकर पूर्वस्थली थाने भेज दिया। पुलिस अधिकारी प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने में जुटे हैं कि दस्तावेज वास्तविक हैं या नकली, और इन्हें यहां किस मकसद से फेंका गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं यह किसी संगठित नेटवर्क या फर्जी दस्तावेज रैकेट से जुड़ा मामला तो नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों को पानी में फेंकने का उद्देश्य सबूत मिटाने जैसा हो सकता है।
घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ ही घंटे में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस प्रकार पहचान पत्रों का मिलना चुनावी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। उनका कहना है कि जनता के महत्वपूर्ण दस्तावेजों का लापरवाही से तालाब में मिलना गंभीर अपराध है और दोषियों को चिन्हित किया जाना चाहिए।
इसी बीच स्थानीय प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बरामद किए गए दस्तावेजों की वैधता की जांच विशेषज्ञ टीम द्वारा कराई जा रही है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि घटना का किसी सरकारी जनगणना या पहचान सत्यापन कार्यक्रम से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, तथा यह मामला व्यक्तिगत पहचान दस्तावेजों से जुड़ा अपराध प्रतीत होता है।

ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भय और असमंजस का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि बरामद दस्तावेज वास्तविक हैं तो यह बड़ी सुरक्षा चूक है, और यदि नकली हैं तो यह फर्जीवाड़े का गंभीर मामला है। कई नागरिकों ने आशंका जताई कि पहचान चोरी या धोखाधड़ी के उद्देश्य से ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता था।
पुलिस ने कहा है कि इस मामले में आवश्यक फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी तथा जिन व्यक्तियों का डेटा इन कार्डों पर है, उनकी पहचान सुनिश्चित कर संदर्भ की जांच की जाएगी। वहीं, प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मामले को लेकर अफवाहों से बचें और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखें।
घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील पहचान दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल ग्रामीणों से लेकर प्रशासन तक हर स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।














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