शगुन हॉल विवाद ने खोले नए पन्ने, रेशमा पर सवाल तेज़

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आसनसोल: आसनसोल नगर निगम के वार्ड संख्या 23 के अंतर्गत स्थित शगुन श्रीनगर कम्यूनिटी हॉल पर मचा घमासान अब और गहराता जा रहा है। हर बीतते दिन के साथ इस विवाद में नए खुलासे हो रहे हैं, और सत्तारूढ़ दल की पार्षद सी.के. रेशमा पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शुक्रवार को इस विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब मेयर विधान उपाध्याय ने मीडिया के सामने कई विस्फोटक दावे किए, जिनसे पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गई।

मेयर ने कहा कि पार्षद रेशमा वर्ष 2016 से इस हॉल का संचालन कर रही हैं, लेकिन 2021 से पहले तक उन्होंने निगम में एक भी रुपया जमा नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि “रेशमा द्वारा 2021 से 2024 तक कुल 5 से साढ़े पांच लाख रुपए का भुगतान किया गया है, लेकिन उससे पहले के पांच वर्षों का कोई लेखा-जोखा नहीं है।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब हॉल से संबंधित कई पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। मेयर ने रेशमा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज करवाई है, वहीं रेशमा ने भी निगम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाए हैं। इस बीच, टेंडर प्राप्त कंपनी एमबी इंटरप्राइज ने भी बयान जारी कर रेशमा पर झूठे आरोप लगाने का ठीकरा फोड़ा है।

पैसे लौटाने को लेकर भी उठा विवाद

मेयर ने एक और मामला उजागर करते हुए बताया कि एक व्यक्ति ने अपने परिवार की शादी के लिए शगुन मैरिज हॉल को ₹23,000 देकर बुक किया था। लेकिन घर में अचानक आई बीमारी और खर्चों की वजह से शादी रद्द करनी पड़ी। उस व्यक्ति ने हॉल प्रबंधन से पैसे लौटाने की मांग की, लेकिन उन्हें राशि नहीं दी गई। मेयर ने खुद उस रकम की वापसी का निर्देश दिया था, फिर भी पैसे नहीं लौटाए गए। पीड़ित व्यक्ति ने शुक्रवार को फिर से मेयर से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई और अपना पैसा वापस दिलाने की गुहार लगाई।

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संचालन अधिकार पर भी गहराया विवाद

नगर निगम के कार्यकारी अभियंता आर.के. श्रीवास्तव ने इस मामले पर कहा कि “वर्तमान में आसनसोल वूमेन्स वेलफेयर एसोसिएशन को शगुन हॉल के संचालन का कोई वैध अधिकार नहीं है।” उन्होंने बताया कि एसोसिएशन द्वारा बैकडेट में फर्जी दस्तावेज दिखाकर संचालन जारी रखा जा रहा है, जो पूर्णतः अवैध है। निगम प्रशासन ने एसोसिएशन को हॉल खाली करने का निर्देश दिया है, लेकिन आदेश की अवहेलना की जा रही है।

अभियंता ने यह भी बताया कि निगम ने इस पूरे मामले में कानूनी सलाह ली है और जल्द ही कोर्ट की मदद से हॉल को निगम के नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रेशमा पर बढ़ते सवाल और राजनीतिक पृष्ठभूमि

इस विवाद का एक राजनीतिक पहलू भी है। रेशमा ने वर्ष 2015 में भाजपा के टिकट पर पार्षद चुनाव जीता था और बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं। उस समय तत्कालीन मेयर जितेंद्र तिवारी ने उनकी पार्टी में एंट्री कराई थी। अब हालात बदल चुके हैं — तिवारी भाजपा में लौट चुके हैं और रेशमा तृणमूल में रहते हुए सवालों के घेरे में हैं। विरोधी दलों का कहना है कि “रेशमा को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रहा है, इसी वजह से वर्षों तक उन्होंने बिना जवाबदेही के हॉल का संचालन किया।”

पुलिस भी मैदान में, निगम से लिए दस्तावेज

शुक्रवार को आसनसोल उत्तर थाना की पुलिस टीम नगर निगम मुख्यालय पहुंची। टीम ने पहले मेयर विधान उपाध्याय से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली, इसके बाद कार्यकारी अभियंता आर.के. श्रीवास्तव से भी दस्तावेज लिए। पुलिस ने मेयर द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हॉल से प्राप्त राशि किस बैंक खाते में जाती रही और क्या उसमें किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी हुई।

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जनता के बीच चर्चा और नाराज़गी

स्थानीय लोगों में इस पूरे प्रकरण को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जिस हॉल को सामुदायिक उपयोग और गरीब तबके की शादियों के लिए बनाया गया था, वह अब राजनीतिक विवादों और वित्तीय अनियमितताओं का अड्डा बन चुका है। लोग पूछ रहे हैं कि नगर निगम इतनी देर तक क्यों खामोश रहा और अब जाकर कार्रवाई क्यों की जा रही है।

अंत में बड़ा सवाल

अब सवाल यह है कि क्या निगम प्रशासन वाकई इस विवाद को निष्पक्षता से सुलझाएगा या यह मामला भी राजनीतिक रस्साकशी में उलझकर रह जाएगा? फिलहाल शगुन हॉल विवाद आसनसोल की राजनीति में नया भूचाल ला चुका है, और हर दिन इस कहानी का एक नया अध्याय खुल रहा है।

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