
आसनसोल : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। राज्य में एसआईआर लागू होने के बाद से लगातार विवाद और विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस अभियान को “एसआईआर का आतंक” बताते हुए इसे केंद्र सरकार की राजनीतिक चाल करार दिया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है।
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस वार्ता कर पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया लागू करने की घोषणा की थी। इसके तहत चार नवंबर से बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म वितरण और मतदाता सूची में संशोधन का कार्य कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुई कई मौतों को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है।
टीएमसी का दावा – “एसआईआर से उपजा भय बना मौत का कारण”
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर जनता में भय और असमंजस फैला है, जिसके चलते अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार को कोलकाता स्थित टीएमसी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. शशि पांजा और शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने इन घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।

डॉ. पांजा ने कहा —
“ये लोग इस देश के नागरिक थे, गर्व से भारत माता की जय कहते थे, लेकिन केंद्र सरकार ने बंगाल को नीचा दिखाने और लोगों को डराने के लिए एसआईआर लागू किया। इसी दहशत में कई लोग अपनी जान गंवा बैठे।”
टीएमसी ने मृतकों की सूची भी जारी की, जिनमें झाड़ग्राम, मुर्शिदाबाद, बांकुड़ा, पूर्व बर्धमान, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना और कुचबिहार जिलों के नाम शामिल हैं। इनमें बेलपहाड़ी के दामन महतो, बहरमपुर के तारक साहा, कांदी के मोहन शेख, जमालपुर के बिमल सांतरा और टिटागढ़ की काकलि सरकार जैसे कई नाम प्रमुख हैं।
अभिषेक बनर्जी ने केंद्र पर बोला तीखा हमला
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने हाल ही में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए कहा था कि “एसआईआर के नाम पर बंगाल के लोगों को डराया जा रहा है। यह वही नीति है जो एनआरसी और सीएए के समय अपनाई गई थी। भाजपा को जनता की नहीं, सिर्फ वोटों की चिंता है।”
उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी मांग की कि जब तक राज्य में स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पिछले सप्ताह इसी मुद्दे पर केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा था कि “अगर जनता को परेशान किया गया, तो बंगाल की जनता जवाब देगी।”
भाजपा का पलटवार – “टीएमसी कर रही है मौतों की राजनीति”
वहीं, भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि “तृणमूल कांग्रेस हर मुद्दे को राजनीति का रंग देती है। किसी की आत्महत्या या बीमारी से हुई मौत को एसआईआर से जोड़ना बेहद गैरजिम्मेदाराना रवैया है। इसका एसआईआर से कोई संबंध नहीं है।”
भाजपा ने आरोप लगाया कि टीएमसी जनता में भ्रम फैलाने का काम कर रही है ताकि चुनाव आयोग की पारदर्शी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा सकें।
विशेषज्ञों ने कहा — “जन-जागरूकता की कमी से उपजा भ्रम”
राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एसआईआर को लेकर जनता में सही जानकारी की कमी है। कई लोग इसे एनआरसी या नागरिकता छीनने जैसी प्रक्रिया समझ बैठे हैं, जिससे असुरक्षा की भावना पनप रही है। अगर प्रशासन इस प्रक्रिया के उद्देश्य और सीमाओं को साफ-साफ समझाए, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

माहौल तनावपूर्ण, चुनाव आयोग की चुप्पी बरकरार
इस पूरे विवाद पर अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि आयोग के सूत्रों का कहना है कि एसआईआर एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है।
फिलहाल, बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा एक नया तूफान बन चुका है। एक ओर तृणमूल कांग्रेस इसे “जनविरोधी नीति” बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे “भ्रम फैलाने की साजिश” करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तीखा रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।














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