
बर्नपुर : औद्योगिक नगरी आसनसोल के बर्नपुर क्षेत्र में स्थित इस्को स्टील प्लांट (आईएसपी) के न्यू सारामारा गेट पर अवैध रंगदारी वसूली का मामला फिर सुर्खियों में है। रविवार को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गेट से बाहर निकलने वाले मालवाहक और ट्रक चालकों से खुलेआम जबरन पैसे वसूले जा रहे हैं। इस पूरे रैकेट के पीछे कथित तौर पर एक संगठित स्थानीय सिंडिकेट काम कर रहा है, जो राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।
वाहन चालकों की व्यथा — “हर दिन देना पड़ता है रंगदारी”
न्यू सारामारा गेट से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक और कंटेनर इस्को प्लांट से बाहर निकलते हैं। चालकों का कहना है कि उन्हें बिना किसी पर्ची या रसीद के जबरन पैसा देना पड़ता है। एक चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया —
“हर ट्रक से 800 से लेकर 1000 रुपये तक वसूला जाता है। अगर कोई मना करे तो धमकाया जाता है कि ट्रक को गेट से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। रात के समय वसूली की रकम और बढ़ जाती है।”
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह वसूली का खेल कोई नया नहीं, बल्कि वर्षों से जारी है। पहले यह काम कुछ स्थानीय दबंगों के हाथों में था, लेकिन अब यह एक संगठित नेटवर्क में बदल चुका है, जिसमें कुछ स्थानीय नेता, ठेकेदार और दलाल भी शामिल बताए जा रहे हैं।
हर महीने लाखों की अवैध कमाई, प्रशासन मौन
गोपनीय सूत्रों के अनुसार, इस रंगदारी से हर महीने लाखों रुपये की रकम इकट्ठी की जाती है। बताया जाता है कि यह रकम आपसी हिस्सेदारी के हिसाब से बांटी जाती है। वसूली की रकम का हिस्सा कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोगों तक भी पहुंचता है।
एक स्थानीय व्यवसायी ने कहा —
“यह क्षेत्र औद्योगिक जोन है, जहां पुलिस और सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं, फिर भी अगर खुलेआम वसूली हो रही है तो जाहिर है कि कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है।”

दो साल पहले हुई थी कार्रवाई, अब फिर शुरू हुआ खेल
करीब दो वर्ष पूर्व जब रंगदारी की शिकायतें बढ़ीं, तो स्थानीय प्रशासन ने जांच बैठाई थी और कुछ दिनों तक वसूली पर रोक भी लगाई गई थी। लेकिन कुछ ही महीनों में यह अवैध काम फिर शुरू हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “प्रशासन की कार्रवाई दिखावटी थी। कुछ दिनों तक खामोशी रही, फिर वही पुराना खेल लौट आया।”
राजनीतिक संरक्षण के आरोप, प्रशासन ने दी सफाई
इस मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी खलबली मच गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सत्ता में बैठे कुछ लोग इस सिंडिकेट को संरक्षण दे रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस मामले में आंख मूंदे बैठे हैं।
वहीं, इस्को स्टील प्लांट प्रबंधन ने इस पूरे प्रकरण से दूरी बनाते हुए कहा —
“हमें अभी तक इस विषय पर कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई ठोस प्रमाण मिलता है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
स्थानीय रूपनारायणपुर थाना पुलिस ने भी यही कहा कि फिलहाल कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है। थाना प्रभारी ने बताया कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
औद्योगिक छवि पर धब्बा, श्रमिक संगठनों में नाराजगी
औद्योगिक क्षेत्र बर्नपुर लंबे समय से अपने श्रम और उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन इस तरह की घटनाएं उसकी छवि पर बुरा असर डाल रही हैं। श्रमिक संगठनों ने इसे “प्रशासनिक लापरवाही” बताते हुए कहा है कि यदि वसूली पर जल्द अंकुश नहीं लगा, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
इस्को स्टील वर्कर्स यूनियन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा —
“रंगदारी के कारण मजदूर और ड्राइवर दोनों परेशान हैं। यह क्षेत्र विकास का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन यहां भय और भ्रष्टाचार का माहौल है।”

स्थानीय नागरिक बोले — “बंद हो अवैध वसूली का कारोबार”
सारामारा गेट के आसपास रहने वाले लोगों ने भी अवैध वसूली को लेकर नाराजगी जताई। स्थानीय निवासी गुरुदेव बाउरी ने कहा —
“हर दिन दर्जनों ट्रक यहां से गुजरते हैं, और लोग वसूली करते हुए खुलेआम खड़े रहते हैं। प्रशासन अगर चाहे तो एक दिन में यह सब खत्म कर सकता है, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।”
तृणमूल कांग्रेस ने कहा — ‘जांच होगी तो सच्चाई सामने आएगी’
इस विषय पर तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश सचिव वी. शिवदासन दासू ने कहा कि उन्हें इस वसूली की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा —
“अगर ऐसा हो रहा है तो प्रशासन को जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। हमारी पार्टी किसी भी अवैध गतिविधि को बढ़ावा नहीं देती।”
विशेषज्ञों की राय — “सिंडिकेट पर अंकुश जरूरी”
औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वसूली केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास की गति में बाधा है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी, नियमित पुलिस गश्त और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली को मजबूत करना होगा ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
बर्नपुर जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह का रंगदारी तंत्र न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, बल्कि उन हजारों श्रमिकों की मेहनत पर भी धब्बा लगाता है जो रोज इस प्लांट की प्रगति में योगदान देते हैं। जनता अब यही उम्मीद कर रही है कि इस बार जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों को सच में सजा मिले।














Users Today : 4
Users Yesterday : 30