
पांडवेश्वर : रविवार को पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र के जामबाद बेनियाडीह इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 40 साल से कोलियरी क्षेत्र में रह रहे एक कर्मचारी परिवार ने गंभीर आरोप लगाया है कि पुनर्वासन के नाम पर उन्हें जो मुआवजा राशि मिलनी थी, वह उनके रिश्तेदारों के खाते में गलत तरीके से ट्रांसफर कर दी गई।
इस पूरे मामले ने स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। परिवार की मुखिया छाया भूमि ने बताया कि उनके पति ईसीएल में कर्मचारी हैं और दोनों कैंसर से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें वर्षों की सेवा के बाद भी पुनर्वासन के पैसे नहीं मिले। छाया भूमि ने आरोप लगाया कि रंजीत भूमि और संजीत भूमि, जो उनके ही रिश्तेदार हैं, ने चालाकी से सर्वेयर और कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर उनके नाम पर मिलने वाली राशि अपने बैंक खातों में जमा करा ली।

छाया भूमि ने कहा —
“हम 40 साल से जामबाद कोलियरी के तीन नंबर इलाके में रह रहे हैं। जब पुनर्वासन की बात आई, तो सर्वेयर ने कहा कि पैसा ईसीएल कर्मचारी के खाते में जाएगा। लेकिन अब हमारे पास कुछ नहीं आया, सारा पैसा गलत खाते में चला गया। हमने कई बार ईसीएल दफ्तर में जाकर गुहार लगाई, पर सुनवाई नहीं हुई।”
उन्होंने बताया कि वे अपने पति के इलाज के लिए पहले ही कर्ज में डूबी हैं, और अब यह फर्जीवाड़ा उनके परिवार को सड़क पर ला खड़ा किया है। छाया भूमि ने रोते हुए कहा कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मदद की अपील की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

पांडवेश्वर मंडल-2 के अध्यक्ष बेनूधर मंडल
इस मामले पर भाजपा नेता और पांडवेश्वर मंडल-2 के अध्यक्ष बेनूधर मंडल ने भी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला ईसीएल प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। बेनूधर मंडल ने कहा —
“एक कर्मचारी जो वर्षों से कंपनी की सेवा कर रहा था, वह आज बीमारी से जूझ रहा है। उसकी पत्नी और परिवार पुनर्वासन की राशि के लिए दर-दर भटक रहे हैं, और ईसीएल अधिकारी चुप हैं। यह बेहद शर्मनाक स्थिति है।”
उन्होंने आश्वासन दिया कि भाजपा इस पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जल्द ही इस मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर ईसीएल प्रशासन ने सात दिनों के भीतर इस फर्जीवाड़े की जांच शुरू नहीं की, तो पार्टी आंदोलन का रास्ता अपनाएगी।
स्थानीय लोगों ने भी ईसीएल और सर्वे टीम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। क्षेत्र के एक बुजुर्ग निवासी ने कहा —
“यह पहला मामला नहीं है। पहले भी कई परिवारों को पुनर्वासन के नाम पर ठगा गया है। सर्वे में मनमानी होती है, और पैसे उन्हीं लोगों के खाते में जाते हैं जो अधिकारियों से मेलजोल रखते हैं।”
ग्रामीणों का कहना है कि ईसीएल के पुनर्वासन प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की भारी कमी है। न तो सर्वे की रिपोर्ट खुले तौर पर जारी की जाती है, न ही लाभार्थियों की सूची। इसका फायदा उठाकर कई फर्जीवाड़े किए जा रहे हैं।
वहीं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जामबाद क्षेत्र में पुनर्वासन के तहत दर्जनों परिवारों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिली है। कई जगह शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन जांच के नाम पर फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं।
राजनीतिक हलकों में यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा ने जहां इसे “ईसीएल की विफलता और भ्रष्टाचार का उदाहरण” बताया, वहीं तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता इसे “राजनीतिक नाटक” करार दे रहे हैं। लेकिन पीड़ित परिवारों के आंसू बताते हैं कि समस्या केवल राजनीति नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की भी है।

छाया भूमि ने अंत में कहा —
“हमें किसी राजनीतिक लाभ की नहीं, अपने हक की जरूरत है। हमने ईमानदारी से जिंदगी बिताई है, अब बस हमारा हक हमें मिल जाए।”
रविवार का दिन जामबाद बेनियाडीह के इस परिवार के लिए उम्मीद और आक्रोश दोनों लेकर आया। स्थानीय लोग अब यह मांग कर रहे हैं कि ईसीएल इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और कर्मचारी को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।














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