
आसनसोल : रेल पार में हुए कथित करोड़ों रुपये के आर्थिक घोटाले को लेकर आसनसोल कांग्रेस ने मंगलवार को एक बार फिर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला बोला। गिरजा मोड़ स्थित कांग्रेस पार्टी कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य प्रसनजीत पुईतुंडी और शाह आलम ने इस पूरे मामले पर कई गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि यह कोई मामूली आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि लगभग 350 से 450 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में मुख्य आरोपी के रूप में टीएमसी के अल्पसंख्यक सेल के पूर्व वाइस चेयरमैन शकील अहमद के पुत्र तहसीन अहमद का नाम सामने आया है, जो इस समय जेल में बंद है।
प्रसनजीत पुईतुंडी ने कहा कि “यह कोई पहली बार नहीं है जब टीएमसी से जुड़े किसी व्यक्ति या उसके परिवार का नाम किसी वित्तीय घोटाले में सामने आया हो। शारदा, रोज़ वैली जैसे कुख्यात चिटफंड घोटालों में भी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के नाम जुड़े थे।”

उन्होंने आगे बताया कि हाल ही में उनके पास कोलकाता स्थित एक निजी कंपनी की बैलेंस शीट आई है, जो एक प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा तैयार की गई है। उस दस्तावेज़ में ‘शकील अहमद’ नामक व्यक्ति द्वारा एक लाख रुपये की पूंजी निवेश और एक सिस्टर कंपनी को 70 लाख रुपये का अनसिक्योर्ड लोन देने की जानकारी दर्ज है।
कांग्रेस नेताओं ने यह सवाल उठाया कि —
“क्या यह वही शकील अहमद हैं जो तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक सेल के जिला उपाध्यक्ष रहे हैं और जिनके पुत्र तहसीन अहमद इसी घोटाले में जेल में बंद हैं?”
उन्होंने कहा कि अगर यह एक ही व्यक्ति हैं, तो यह समझना जरूरी है कि एक स्कूल शिक्षक के पास इतनी बड़ी पूंजी कहां से आई? क्या यह धनराशि उसी घोटाले से जुड़ी है या किसी अन्य वित्तीय लेन-देन का परिणाम है?
प्रेस वार्ता में शाह आलम ने प्रशासन से इस मामले की गहन जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस के पास उपलब्ध दस्तावेज़ प्रमाणिक हैं और यदि जांच एजेंसियां इस दिशा में काम करें तो पूरा सच सामने आ सकता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी इस मुद्दे पर ‘स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या शकील अहमद अभी भी पार्टी में हैं, तो कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “टीएमसी यह स्पष्ट नहीं कर पा रही कि उन्होंने उन्हें निलंबित किया है या नहीं।”
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण का भी है। उन्होंने प्रशासन और जांच एजेंसियों से आग्रह किया कि वे कोलकाता की उक्त कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करें और यह पता लगाएँ कि बैलेंस शीट में दर्ज ‘शकील अहमद’ वास्तव में कौन हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह वही व्यक्ति हैं जो टीएमसी के स्थानीय नेता और तहसीन अहमद के पिता हैं, तो उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए, क्योंकि इस पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है।
अंत में कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “सरकार की चुप्पी बताती है कि कहीं न कहीं इस घोटाले में सत्ताधारी दल के लोगों की मिलीभगत है। जब तक जांच निष्पक्ष एजेंसी से नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर आगामी दिनों में राज्य स्तर पर आंदोलन करेगी और यदि आवश्यकता पड़ी तो केंद्रीय एजेंसियों से जांच की भी मांग करेगी।














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