बिना अनुमति कटे दर्जनों पेड़, वन विभाग ने शुरू की जांच

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कुल्टी :  आसनसोल उपमहानगर के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। मंगलवार को नियामतपुर मौज़ा के दाग संख्या 317/318 के समीप कुलतोरा चौराहे से जुड़ी सड़क के किनारे दर्जनों बड़े पेड़ों को काट दिए जाने की खबर ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से इस क्षेत्र में भूमि समतलीकरण का कार्य जारी था और उसी दौरान रात के अंधेरे में पेड़ों को गुपचुप तरीके से काटा गया।

मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग की आसनसोल रेंज (हाडला बिट) की अधिकारी श्राबंती घोष मंगलवार को घटनास्थल पर पहुँचीं और पूरी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में पेड़ काटने के लिए किसी को भी विभाग की ओर से अनुमति नहीं दी गई थी। पेड़ों की कटाई पूरी तरह अवैध मानी जाएगी।

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उन्होंने कहा—

“हमने घटनास्थल से लकड़ी के ठूंठ और कुछ गिरे हुए तनों को जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह कार्य योजनाबद्ध तरीके से किया गया। ज़मीन मालिकों और संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

स्थानीय निवासियों ने बताया कि जिस क्षेत्र में यह पेड़ काटे गए हैं, वहां पहले घने बबूल, नीम और पीपल के पेड़ थे जो वर्षों से इलाके की हरियाली बढ़ाते थे। एक निवासी ने कहा, “पेड़ काटने से यहाँ की हवा में धूल और धुएँ का असर बढ़ गया है। गर्मी भी पहले से ज़्यादा महसूस हो रही है।”

सूत्रों के अनुसार, इस भूमि पर निर्माण की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने कथित रूप से निजी परियोजना के लिए ज़मीन को साफ़ करवाया है, लेकिन न तो नगर निगम से और न ही वन विभाग से इसकी मंज़ूरी ली गई थी।

पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही पेड़ों की अवैध कटाई से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन भी बिगड़ रहा है।

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वन विभाग ने अब इलाके में निगरानी बढ़ाने और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है। अधिकारी श्राबंती घोष ने यह भी कहा कि यदि कोई नागरिक पेड़ काटने या अवैध निर्माण की जानकारी देता है, तो उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सरकार हरियाली बढ़ाने और वृक्षारोपण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो स्थानीय स्तर पर ऐसी अवैध गतिविधियाँ कैसे जारी हैं? अब देखना यह होगा कि विभाग दोषियों तक पहुँचकर उन्हें सज़ा दिला पाता है या नहीं।

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