आसनसोल : शुक्रवार को शहर के गैलेक्सी मॉल स्थित ‘द फर्न रेजीडेंसी’ के लोटस बैंक्वेट हॉल में एक व्यापक एमएसएमई आउटरीच शिविर का आयोजन किया गया, जिसने औद्योगिक और व्यापारिक जगत के प्रतिनिधियों को एक ही मंच पर संवाद का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान बैंक अधिकारियों और व्यापारिक समुदाय के बीच रचनात्मक चर्चा हुई, जिसमें वित्तीय सहायता, डिजिटल बैंकिंग और उद्यम विकास से जुड़ी नई योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की शुरुआत यूनियन बैंक के जोनल हेड लोकनाथ साहू और रीजनल हेड भावेश प्रकाश ने स्वागत भाषण के साथ की। दोनों अधिकारियों ने बैंक की ओर से MSME क्षेत्र के लिए चल रही विशेष योजनाओं—जैसे कम ब्याज दर वाले ऋण, महिला उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन योजना, डिजिटल लेन-देन की नई सेवाएँ और आसान क्रेडिट सुविधा—का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बैंक का लक्ष्य है कि व्यापारियों को पूंजी की कमी के कारण किसी भी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े।
आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव शंभूनाथ झा ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के संयुक्त शिविर व्यापारियों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होते हैं। उन्होंने बताया कि चेंबर और बैंक के बीच लगातार संवाद होने से छोटे–मध्यम व्यापारियों को अपनी समस्याएँ सीधे साझा करने और त्वरित समाधान पाने का अवसर मिलता है। झा ने बैंक अधिकारियों को व्यापारियों की वास्तविक जरूरतों से अवगत कराया और उद्योग-अनुकूल नीतियों को और मजबूत करने पर बल दिया।
शिविर में यूनियन बैंक के विशेषज्ञों ने विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से MSME के लिए उपलब्ध योजनाओं की जानकारी दी। क्रेडिट गारंटी योजना, स्टार्ट-अप वित्त, टर्म लोन, ओवरड्राफ्ट सुविधा, निर्यात–आधारित वित्त और डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म को लेकर व्यापारियों की खूब भीड़ रही। उद्यमियों ने अपने-अपने व्यवसायों की आवश्यकताओं के मुताबिक सलाह ली और ऋण आवेदन की प्रक्रिया को विस्तार से समझा।
शिविर में भाग लेने आए कई नए उद्यमियों ने कहा कि बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जा रही जानकारी उनके लिए बेहद उपयोगी रही। एक युवा उद्यमी ने बताया कि वह लंबे समय से उपकरण खरीदने के लिए वित्त की तलाश में थे और इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें आसान क्रेडिट सुविधा के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन मिला।
इस अवसर पर चेंबर ऑफ कॉमर्स के सैकड़ों सदस्य मौजूद थे। व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने जीएसटी, कार्यशील पूंजी, ऑनलाइन भुगतान सुरक्षा और बाजार विस्तार जैसे विषयों पर बैंक अधिकारियों से अनेक सवाल पूछे। अधिकारियों ने प्रत्येक प्रश्न का विस्तार से उत्तर देते हुए भरोसा दिलाया कि बैंक व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

कार्यक्रम में व्यवसायियों को डिजिटल बैंकिंग के महत्व और उसके सुरक्षित उपयोग पर भी जागरूक किया गया। यूनियन बैंक की टीम ने बताया कि आने वाले वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म MSME क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित होंगे, इसलिए समय रहते इन तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
अंत में, बैंक अधिकारियों और चेंबर प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कहा कि शहर के व्यापारी और उद्योग जगत को सशक्त बनाना दोनों संस्थाओं का साझा लक्ष्य है। शिविर का उद्देश्य भी यही था कि व्यापारी नवीन योजनाओं से सीधे लाभान्वित हों और उनके व्यवसायों को गति मिले।
पूरे कार्यक्रम के दौरान संवाद, सहयोग और सकारात्मक माहौल बना रहा। आयोजन को बेहद सफल और प्रभावी मानते हुए उपस्थित व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि ऐसे शिविर भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएँगे, जिससे उद्योग और बैंकिंग के बीच भरोसे का यह सेतु और मजबूत होता रहे।

आसनसोल: शुक्रवार को शहर के गैलेक्सी मॉल स्थित ‘द फर्न रेजीडेंसी’ के लोटस बैंक्वेट हॉल में एक व्यापक एमएसएमई आउटरीच शिविर का आयोजन किया गया, जिसने औद्योगिक और व्यापारिक जगत के प्रतिनिधियों को एक ही मंच पर संवाद का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान बैंक अधिकारियों और व्यापारिक समुदाय के बीच रचनात्मक चर्चा हुई, जिसमें वित्तीय सहायता, डिजिटल बैंकिंग और उद्यम विकास से जुड़ी नई योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत यूनियन बैंक के जोनल हेड लोकनाथ साहू और रीजनल हेड भावेश प्रकाश ने स्वागत भाषण के साथ की। दोनों अधिकारियों ने बैंक की ओर से MSME क्षेत्र के लिए चल रही विशेष योजनाओं—जैसे कम ब्याज दर वाले ऋण, महिला उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन योजना, डिजिटल लेन-देन की नई सेवाएँ और आसान क्रेडिट सुविधा—का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बैंक का लक्ष्य है कि व्यापारियों को पूंजी की कमी के कारण किसी भी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े।
आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव शंभूनाथ झा ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के संयुक्त शिविर व्यापारियों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होते हैं। उन्होंने बताया कि चेंबर और बैंक के बीच लगातार संवाद होने से छोटे–मध्यम व्यापारियों को अपनी समस्याएँ सीधे साझा करने और त्वरित समाधान पाने का अवसर मिलता है। झा ने बैंक अधिकारियों को व्यापारियों की वास्तविक जरूरतों से अवगत कराया और उद्योग-अनुकूल नीतियों को और मजबूत करने पर बल दिया।
शिविर में यूनियन बैंक के विशेषज्ञों ने विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से MSME के लिए उपलब्ध योजनाओं की जानकारी दी। क्रेडिट गारंटी योजना, स्टार्ट-अप वित्त, टर्म लोन, ओवरड्राफ्ट सुविधा, निर्यात–आधारित वित्त और डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म को लेकर व्यापारियों की खूब भीड़ रही। उद्यमियों ने अपने-अपने व्यवसायों की आवश्यकताओं के मुताबिक सलाह ली और ऋण आवेदन की प्रक्रिया को विस्तार से समझा।
शिविर में भाग लेने आए कई नए उद्यमियों ने कहा कि बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जा रही जानकारी उनके लिए बेहद उपयोगी रही। एक युवा उद्यमी ने बताया कि वह लंबे समय से उपकरण खरीदने के लिए वित्त की तलाश में थे और इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें आसान क्रेडिट सुविधा के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन मिला।
इस अवसर पर चेंबर ऑफ कॉमर्स के सैकड़ों सदस्य मौजूद थे। व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने जीएसटी, कार्यशील पूंजी, ऑनलाइन भुगतान सुरक्षा और बाजार विस्तार जैसे विषयों पर बैंक अधिकारियों से अनेक सवाल पूछे। अधिकारियों ने प्रत्येक प्रश्न का विस्तार से उत्तर देते हुए भरोसा दिलाया कि बैंक व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

कार्यक्रम में व्यवसायियों को डिजिटल बैंकिंग के महत्व और उसके सुरक्षित उपयोग पर भी जागरूक किया गया। यूनियन बैंक की टीम ने बताया कि आने वाले वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म MSME क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित होंगे, इसलिए समय रहते इन तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
अंत में, बैंक अधिकारियों और चेंबर प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कहा कि शहर के व्यापारी और उद्योग जगत को सशक्त बनाना दोनों संस्थाओं का साझा लक्ष्य है। शिविर का उद्देश्य भी यही था कि व्यापारी नवीन योजनाओं से सीधे लाभान्वित हों और उनके व्यवसायों को गति मिले।
पूरे कार्यक्रम के दौरान संवाद, सहयोग और सकारात्मक माहौल बना रहा। आयोजन को बेहद सफल और प्रभावी मानते हुए उपस्थित व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि ऐसे शिविर भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएँगे, जिससे उद्योग और बैंकिंग के बीच भरोसे का यह सेतु और मजबूत होता रहे।














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