दुर्गापुर : शुक्रवार को सृजनी थियेटर सभागार में चार जिलों—पूर्व व पश्चिम बर्धमान, बाँकुड़ा तथा पुरुलिया—के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित क्षेत्रीय सिनर्जी सम्मेलन भव्य रूप से आयोजित किया गया। दोपहर बाद शुरू हुए इस सम्मेलन में उद्योग, प्रशासन और सरकारी विभागों के शीर्ष प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरा सभागार उद्यमिता, निवेश और उद्योग विस्तार को लेकर चर्चाओं से सराबोर रहा।

कार्यक्रम का उद्घाटन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग तथा कारा विभाग के मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा ने किया। उनके साथ पंचायत, ग्रामीण विकास एवं सहकारिता मंत्री प्रदीप मजूमदार, पश्चिम क्षेत्र विकास बोर्ड की मंत्री संध्या रानी टुडू, चारों जिलों के जिलाधिकारी, जिला परिषद अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समूचा कार्यक्रम पूर्वांचल क्षेत्र को औद्योगिक रूप से सशक्त करने की रणनीति पर आधारित था।
सम्मेलन में पहला सत्र पश्चिम बर्धमान जिले की औद्योगिक प्रगति पर केंद्रित रहा। अधिकारियों ने प्रस्तुति देते हुए बताया कि दुर्गापुर–आसनसोल औद्योगिक क्षेत्र को पूर्वी भारत का नया औद्योगिक गलियारा बनाने के लिए कई परियोजनाएँ गति पकड़ चुकी हैं। पानागढ़, अंडाल और आसनसोल क्षेत्र में मिलकर करीब 350 करोड़ रुपये का निवेश अनुमोदित किया गया है। इन परियोजनाओं से विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और सेवा क्षेत्र में हजारों नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद जताई गई।
पूर्व बर्धमान, पुरुलिया और बाँकुड़ा के बारे में अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए, जहाँ इन जिलों की MSME क्षमता पर विस्तृत चर्चा हुई। पुरुलिया में 90 करोड़ रुपये की नई औद्योगिक इकाइयों की घोषणा की गई, जिनमें खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण शिल्प आधारित इकाइयाँ शामिल हैं। बाँकुड़ा जिले के लिए 4590 करोड़ रुपये के विशाल निवेश पैकेज ने उपस्थित उद्यमियों में उत्साह भर दिया। इस जिले में धातु आधारित उत्पाद, मिट्टी शिल्प, रेशम उद्योग और अन्य ग्रामीण उत्पादन केंद्रों को बढ़ावा देने की योजना साझा की गई।

पूर्व बर्धमान में 590 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं, जिन्हें कृषि-आधारित उद्योग, छोटे विनिर्माण केंद्र और हस्तशिल्प हब के रूप में विकसित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इन तीन जिलों में शाल पत्ता क्लस्टर, हस्तशिल्प हब और लघु विनिर्माण इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार गाँवों तक फैलेगा और महिलाओं व स्थानीय कारीगरों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
सम्मेलन में राज्य सरकार द्वारा MSME को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु विशेष ऋण वितरण कार्यक्रम भी रखा गया। मंच पर ही कई नए उद्यमियों को ऋण स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले महीनों में राज्यभर में MSME समर्थित वित्तीय योजनाओं का व्यापक अभियान चलाया जाएगा, जिससे युवाओं को उद्यमिता की दिशा में प्रेरित किया जा सके।
अपने संबोधन में मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा ने स्पष्ट कहा—
“हमारा लक्ष्य है हर जिले में रोजगार और हर गाँव में उद्योग। MSME बंगाल की आर्थिक रीढ़ हैं, इसलिए सरकार इनके विकास के लिए हरसंभव समर्थन देगी।”

मंत्री प्रदीप मजूमदार और संध्या रानी टुडू ने भी सम्मेलन को पूर्वांचल के औद्योगिक विकास की नई शुरुआत बताते हुए कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि औद्योगिक पुनर्जागरण का मार्ग है।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न उद्यमियों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएँ भी रखीं, जिनमें बिजली दर, कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन सुविधा और निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने से जुड़े सुझाव शामिल थे। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्रस्तुत मुद्दों पर प्राथमिकता से कार्यवाही की जाएगी।
दुर्गापुर का यह सिनर्जी सम्मेलन पूर्वांचल के उद्योग जगत में नई ऊर्जा भरकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।














Users Today : 2
Users Yesterday : 30