रानीगंज अस्पताल में मरीज मौत पर फिर बढ़ा विवाद

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रानीगंज : सोमवार को रानीगंज के एक निजी अस्पताल में महिला मरीज की मौत को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थानीय लोगों और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोपहर तक जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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सूत्रों के अनुसार, जमुड़िया क्षेत्र की रहने वाली लगभग 20 वर्षीय एक युवती को रविवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ने पर तत्काल इलाज के लिए रानीगंज स्थित निजी अस्पताल लाया गया। परिजनों का कहना है कि मरीज को लगातार उल्टी, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत थी। इलाज शुरू होने की उम्मीद में परिजन उसे आपातकालीन कक्ष में भर्ती कराकर राहत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई।

सोमवार सुबह गुस्साए परिजनों और स्थानीय निवासियों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि मरीज को भर्ती करने के बाद डॉक्टर समय पर नहीं आए, जिससे उसकी हालत और गंभीर होती चली गई। परिजनों ने कहा कि रात के समय उन्होंने कई बार अस्पताल कर्मचारियों से डॉक्टर को बुलाने की गुहार लगाई, पर कोई चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचा। मरीज की अवस्था बिगड़ते-बिगड़ते देर रात मौत में बदल गई, जिससे परिवार शोक और आक्रोश दोनों में डूब गया।

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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मरीज को समय पर उचित इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उनके अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस अस्पताल में इलाज के अभाव और डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतें उठी हों। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते महीनों में भी इस तरह की परिस्थितियाँ देखने को मिली हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण स्थितियाँ बार-बार दोहराई जा रही हैं।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से हालांकि अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। कर्मचारियों ने बस इतना कहा कि मरीज को भर्ती करते समय उसकी स्थिति गंभीर थी और हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन इस सफाई से प्रदर्शनकारियों के आक्रोश में कोई कमी नहीं आई। लोग इस बात पर अड़े रहे कि जब शहर में इतने बड़े अस्पताल मौजूद हैं, तो मरीजों को समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर क्यों नहीं मिलते?

परिजनों ने कहा कि वे मामले की लिखित शिकायत प्रशासन को सौंपेंगे और जांच की मांग करेंगे। उनका आरोप है कि रातभर डॉक्टर की गैरमौजूदगी सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि अस्पताल की व्यवस्थागत खामी का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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दिन बढ़ने के साथ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने लोगों से शांत रहने और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की। फिलहाल अस्पताल परिसर में तनाव तो कम हुआ है, लेकिन लोगों के मन में नाराजगी और अविश्वास की भावना जस की तस बनी हुई है।

यह घटना एक बार फिर उस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है जहाँ मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और परिवारों को अनायास ही अपार दुख का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोग प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे।

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