
आसनसोल : बुधवार को आसनसोल नगर निगम के वार्ड संख्या 40 में रेलवे प्रशासन द्वारा बिना पूर्व सूचना मुख्य सड़क पर लगाए गए लोहे के बैरिकेडों ने स्थानीय नागरिकों में भारी नाराज़गी पैदा कर दी। जीटी रोड ट्रैफिक जिमखाना तिराहे से रेलवे स्टेशन, जिला अस्पताल, कल्ला मोड़ और आसपास के कई स्कूलों को जोड़ने वाला यह मार्ग रोज़ाना हजारों लोगों की आवाजाही का प्रमुख रास्ता माना जाता है। मंगलवार देर शाम सड़क के अचानक बंद कर दिए जाने से सुबह होते ही क्षेत्र में भ्रम, जाम और असंतोष का माहौल बन गया।
पार्षद मौमिता बिस्वास मौके पर पहुँचीं, निर्णय पर जताया कड़ा विरोध
स्थिति की जानकारी मिलते ही तृणमूल कांग्रेस की पार्षद मौमिता बिस्वास मौके पर पहुँचीं। उन्होंने गहरी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि रेलवे द्वारा लिया गया यह निर्णय आम नागरिकों के जीवन को अस्त-व्यस्त करने वाला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस मार्ग से रोज़ स्कूली बच्चे, अस्पताल जाने वाले मरीज और नौकरीपेशा लोग निर्बाध रूप से आवाजाही करते थे, उसे बिना सार्वजनिक सूचना के बंद कर देना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“पहले चार पहिया वाहनों को रोका गया, अब बाइक और साइकिल तक को बंद करने का नियम—यह जनता की परेशानी बढ़ाने के अलावा और क्या है?”
पार्षद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि रेलवे प्रशासन जल्द निर्णय वापस नहीं लेता है, तो वे स्थानीय लोगों के साथ बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगी।
आरपीएफ ने कहा—‘उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सड़क बंद’
मौके पर पहुँचे आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि सड़क बंद करने का निर्णय उनके उच्च अधिकारियों के निर्देश पर लिया गया है। हालांकि, बंदी का ठोस कारण उन्होंने साझा नहीं किया। उन्होंने बस इतना कहा कि “रेलवे सुरक्षा” से संबंधित कुछ आंतरिक निर्देश प्राप्त हुए हैं। इस अस्पष्ट बयान ने स्थानीय लोगों की शंकाएं और बढ़ा दीं।
स्थानीय लोगों का आक्रोश—“अब रोज़ाना अतिरिक्त किलोमीटर घूमकर जाना पड़ेगा”
सड़क बंद होते ही सुबह के समय स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर के लिए निकलने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
क्षेत्रवासियों ने नाराज़गी जताते हुए कहा—
“बिना किसी समस्या के हम वर्षों से इस मार्ग का उपयोग कर रहे थे। पर आज अचानक बैरिकेड लगा कर रास्ता बंद कर देना लोगों की कठिनाइयों से मुंह मोड़ने जैसा है।”
अस्पताल ले जाने वाले परिजन भी परेशान दिखाई दिए। उनका कहना था कि रोगी की हालत गंभीर होने पर हर मिनट कीमती होता है, लेकिन सड़क बंद होने से उन्हें लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

सड़क बंद होने से यातायात व्यवस्था चरमराई, सोशल मीडिया पर भी नाराज़गी फूटी
सुबह से ही लोग बैरिकेडों के पास जमा होकर सड़क खुलवाने की मांग करते दिखे। सोशल मीडिया पर भी वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं। कई लोगों ने टिप्पणी की—
“रेलवे प्रशासन को जनता की असुविधा की कोई परवाह नहीं है।”
अन्य उपयोगकर्ताओं ने लिखा कि स्थानीय प्रशासन और नगर निगम को तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति सामान्य करनी चाहिए।
पहले भी हो चुका है विरोध, लेकिन इस बार बढ़ा तनाव
स्थानीय निवासियों के अनुसार रेलवे पहले भी सड़क बंद करने का प्रयास कर चुका है, लेकिन तब जनविरोध के कारण निर्णय स्थगित कर दिया गया था। इस बार रेलवे ने अचानक और कड़े तरीके से पूरे मार्ग पर रोक लगा दी, जिससे नाराजगी और अधिक बढ़ गई है।
पार्षद की पहल पर उच्च-स्तरीय बैठक बुलाने की तैयारी
पार्षद मौमिता बिस्वास ने कहा कि वे नगर निगम और रेलवे अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाएँगी, ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि वार्ड 40 की जनता को परेशानी में छोड़कर रेलवे का मनमाना निर्णय किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
लोगों की मांग—‘सड़क तुरंत खोली जाए, जनहित सर्वोपरि हो’
क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि रेलवे की कोई तकनीकी चिंता है, तो उसका समाधान खोजा जाए, पर सड़क को पूरी तरह बंद करना किसी तरह से न्यायोचित नहीं है।
बुधवार को भी लोग इस उम्मीद में थे कि प्रशासन बीच का रास्ता निकालते हुए सड़क को पुनः खोलने की दिशा में कदम उठाएगा, ताकि रोजमर्रा की ज़िंदगी फिर से सामान्य हो सके।















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