टीडीबी कॉलेज में जीआईएस दिवस पर नई तकनीक की पड़ताल

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रानीगंज : टी.डी.बी. (त्रिवेणी देवी भालोटिया) कॉलेज के भूगोल विभाग में अंतरराष्ट्रीय जीआईएस दिवस का आयोजन विशेष शैक्षणिक माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भू-स्थानिक तकनीकों, डिजिटल मानचित्रण तथा आधुनिक भू-सूचना प्रणालियों के विकसित होते स्वरूप से अवगत कराना था। आयोजन में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने उपस्थित विद्यार्थियों और अध्यापकों के साथ अपने शोधानुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बन गया।

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कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजीव पांडे ने कहा कि भू-सूचना प्रणाली केवल वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक योजनाओं, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, कृषि, परिवहन और शहरी विकास के लिए एक अनिवार्य साधन बन चुकी है। उन्होंने कहा कि “हमारे विद्यार्थी जब इस तकनीक को समझेंगे तो वे न केवल भविष्य की चुनौतियों का समाधान ढूंढ पाएंगे बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।”आयोजित इस कार्यक्रम में दो प्रमुख वक्ताओं ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। दिन के प्रथम सत्र में भाषण देते हुए भू-स्थानिक विज्ञान के युवा विशेषज्ञ डॉ. रितेश कुमार साहू ने जीआईएस की कार्यप्रणाली, डेटा इंटीग्रेशन, उपग्रह चित्रों के विश्लेषण और भू-आकृतिक अध्ययन में इसके प्रयोग पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ. साहू ने कहा कि “आज के समय में जीआईएस वह उपकरण है, जो भौगोलिक समस्याओं के समाधान के साथ-साथ नीतिगत निर्णयों को भी विश्वसनीय आधार प्रदान करता है।” उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कैसे जीआईएस की मदद से जलस्रोतों का संरक्षण, खेती के लिए मिट्टी विश्लेषण, शहरी यातायात प्रबंधन, वनों के बदलाव का अध्ययन और प्राकृतिक खतरे के जोखिम का आकलन अपेक्षाकृत सरल एवं वैज्ञानिक रूप से संभव हो पाया है।

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दोपहर के सत्र में सुश्री अनामिका सेन, जो एक अनुभवी जियोस्पैशियल रिसर्चर हैं और वर्तमान में एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण अनुसंधान संस्थान से जुड़ी हैं, ने विद्यार्थियों को जीआईएस आधारित करियर अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि वैश्विक स्तर पर जियोस्पैशियल विशेषज्ञों की मांग निरंतर बढ़ रही है और यह क्षेत्र आने वाले दशकों में सर्वाधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में गिना जाएगा। सुश्री सेन ने छात्र-छात्राओं को रिमोट सेंसिंग, डेटा विश्लेषण, ड्रोन मैपिंग, भूमि उपयोग अध्ययन एवं स्मार्ट सिटी परियोजनाओं जैसे क्षेत्रों में कौशल विकसित करने की सलाह दी।

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कार्यक्रम का संचालन भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुमा डॉन ने किया। उन्होंने कहा कि विभाग निरंतर ऐसे आयोजनों द्वारा विद्यार्थियों को विषय के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ने का प्रयास करता रहा है। उन्होंने कार्यक्रम के संयुक्त संयोजकों अदिति गेन और सुरजीत कुँडू सहित विभाग के सभी सदस्यों को सफल आयोजन हेतु धन्यवाद दिया।

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छात्र-छात्राओं ने भी वक्ताओं के साथ संवाद किया और तकनीक के वास्तविक उपयोग, अनुसंधान पद्धति, करियर मार्गदर्शन एवं विभिन्न परियोजनाओं के बारे में प्रश्न पूछे। विद्यार्थियों ने कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए अत्यंत उपयोगी रहा और उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का नया दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के समापन पर कॉलेज प्रशासन ने भूगोल विभाग की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक आयोजनों को नियमित रूप से जारी रखने की घोषणा की। जीआईएस दिवस का यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए तकनीकी ज्ञान का मंच बना, बल्कि विज्ञान एवं शोध के प्रति उनकी रुचि को भी सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।

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