आसनसोल : धार्मिक आस्था और सेवा भाव की मिसाल पेश करते हुए आसनसोल निवासी साधिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता निभा प्रकाश ने गुरुवार को उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में चांदी से निर्मित मुख्य द्वार समर्पित किया। यह अर्पण उज्जैन के महंत एवं मंदिर प्रशासन की उपस्थिति में धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर उनके परिजन भी मौजूद रहे।

जानकारी के अनुसार, महाकाल मंदिर के मुख्य प्रवेशद्वार के लिए लगभग 25 किलो चांदी का विशेष द्वार तैयार करा कर निभा प्रकाश ने इसे मंदिर को समर्पित किया। धार्मिक अनुष्ठान पंडित भूषण व्यास के नेतृत्व में संपन्न हुआ। द्वार अर्पण के बाद महंतों ने निभा प्रकाश को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मंदिर विकास में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय है।

निभा प्रकाश लंबे समय से धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही हैं। इससे पूर्व उन्होंने सितंबर माह में पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज के 11 दिवसीय कार्यक्रम का सफल आयोजन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, विद्वानों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया था। उस आयोजन की व्यापकता और अनुशासन के लिए उन्हें विशेष प्रशंसा भी मिली थी।

महाकाल मंदिर में चांदी का द्वार समर्पित किए जाने की खबर आसनसोल क्षेत्र में तेजी से फैल गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उनके इलाके की एक महिला द्वारा इतने महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मंदिर में चांदी का द्वार अर्पित करना गर्व का विषय है। कई लोगों ने इसे आस्था, श्रद्धा और सामाजिक जिम्मेदारी का अनूठा उदाहरण बताया।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि निभा प्रकाश धार्मिक कार्यों में निरंतर आगे रहती हैं और समाज को आध्यात्मिक दिशा में प्रेरित करने का काम करती हैं। उनके इस योगदान से न केवल परिवार बल्कि पूरे आसनसोल की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है।
गुरुवार को हुए इस धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह और चर्चा बनी हुई है। मंदिर प्रबंधन ने भी उनके इस योगदान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।














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