आसनसोल : पश्चिम बंगाल और झारखंड में फैले कोयला कारोबार के गहरे जाल पर शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा प्रहार किया। तड़के शुरू हुई संयुक्त कार्रवाई के तहत एजेंसी की टीमों ने कोयला माफियाओं से जुड़े 40 से अधिक ठिकानों पर धावा बोला। इस कार्रवाई में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे शिल्पांचल में भूचाल ला दिया। ईडी की प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ कि अवैध कोयला कारोबार के इस विस्तृत नेटवर्क के केंद्र में रानीगंज के कुख्यात कारोबारी कृष्ण मुरारी कयाल उर्फ बिल्लू कयाल ही मुख्य संचालक था।

कयाल को लंबे समय से कोयला तस्करी के नए उभरते चेहरे के रूप में देखा जा रहा था, मगर ईडी के दस्तावेज़ों ने पहली बार उसके ‘सिंडिकेट प्रमुख’ होने की पुष्टि की है। बताया गया कि कयाल ने कोयले की काली कमाई को वैध दिखाने के लिए न सिर्फ ज़मीन और कारोबारी साझेदारियों में निवेश किया, बल्कि टॉलीवुड में भी बड़े पैमाने पर पैसे लगाए। इसी निवेश के चलते वह फिल्मी दुनिया में पहचान बनाने में भी सफल रहा और एक बांग्ला फिल्म के लिए हाल ही में ‘बेस्ट बांग्ला प्रोड्यूसर’ का नेशनल अवॉर्ड तक हासिल कर लिया था। यही पुरस्कार उसने 71वें राष्ट्रीय फिल्म समारोह में राष्ट्रपति से अपने हाथों लिया था।

रानीगंज से कोलकाता तक फैला साम्राज्य
ईडी सूत्रों के अनुसार, 52 वर्षीय कयाल का जन्म रानीगंज के तारबांग्ला इलाके में हुआ और युवावस्था में उसने छोटे व्यापारों से शुरुआत की। धीरे-धीरे उसने कोयला क्षेत्र में पैर जमाए और पिछले डेढ़ दशक में वह काले खेल का बड़ा खिलाड़ी बन गया। अनूप माजी उर्फ लाला के निष्क्रिय होते ही शिल्पांचल के कोयला सिंडिकेट में उसका कद तेजी से बढ़ा। बीते तीन वर्षों में शिल्पांचल में उभरे दो नए सिंडिकेट भी उसी की निगरानी में चल रहे थे। कयाल की अगुवाई में लोकेश, पप्पू और शशि समेत कई ऑपरेटर सक्रिय थे।
कोयले की डीलिंग और अवैध खनन से मिली अकूत कमाई का बड़ा हिस्सा कयाल ने कोलकाता में ठिकाने बनाने में लगाया। यहां उसका नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका था कि वह बड़े व्यापारिक समूहों और नए-पुराने कोल ठेकेदारों को जोड़कर पैरेलल सप्लाई चेन तैयार कर चुका था।

फिल्म निर्माण के नाम पर धन शोधन का आरोप
ईडी का मानना है कि कयाल ने फिल्म प्रोडक्शन की आड़ में काले धन को वैध बनाया। अब तक उसके वित्तपोषण में 15 से अधिक बांग्ला फिल्में बन चुकी हैं। इनमें से कई फिल्मों को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अच्छी सफलता भी मिली। ‘डीप फ्रिज’ नामक फिल्म, जिसे मार्च 2024 में रिलीज किया गया था, उसी की प्रोडक्शन कंपनी ने बनाई थी। इस फिल्म को मिली लोकप्रियता और पुरस्कारों ने कयाल को टॉलीवुड में ‘फाइनेंसर से बड़े प्रोड्यूसर’ तक पहुंचा दिया था।
2013 में पहली बार आया था चर्चा में
कृष्ण मुरारी कयाल का नाम 2013 में राज्य सरकार की विदेश यात्रा के दौरान अचानक सुर्खियों में आया था। निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से गए प्रतिनिधिमंडल में उसका शामिल होना राजनीतिक विवाद का कारण बना। उस समय विपक्ष ने सवाल उठाया था कि कोयला कारोबार से जुड़े विवादित व्यक्ति को सरकारी प्रतिनिधिमंडल में क्यों शामिल किया गया। उस समय भी कयाल के रसूख को लेकर खूब चर्चा हुई थी।
झारखंड से बंगाल तक मजबूत जाल
ईडी का दावा है कि कयाल का प्रभाव सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं था। झारखंड के कई जिलों में उसके प्रतिनिधि सक्रिय थे। लालबालू सिंह, कुंभनाथ सिंह और अमर मंडल जैसे नाम झारखंड के मोर्चे संभाल रहे थे, जबकि बंगाल में सुंदर भालोटिया, चिन्मय मंडल, नरेंद्र खरका और अन्य कारोबारी उससे जुड़े थे। कयाल का नेटवर्क इतना फैला हुआ था कि बालू तस्करी में पकड़े गए कुख्यात कारोबारी ‘सैंड किंग’ अरुण सर्राफ के बयान में भी कयाल के कई लिंक सामने आए।
राजनीति में प्रवेश की तैयारी धरी रह गई
सूत्रों की मानें तो कयाल खुद को अब ‘सफेदपोश’ के रूप में स्थापित करने में जुट गया था। बीते एक वर्ष से वह एक बड़े राजनीतिक दल के संपर्क में था और विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए लगातार प्रयासरत था। रानीगंज सीट से उसकी दावेदारी लगभग तय मानी जा रही थी। कहा जा रहा है कि कयाल अपने आर्थिक प्रभाव का उपयोग कर राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करना चाहता था, ताकि उसके पुराने धंधों की जांच कभी उसे परेशान न कर सके। मगर ईडी की इस कार्रवाई ने उसका यह सपना अधूरा कर दिया।

शिल्पांचल में तनाव, राजनीतिक गलियारों में खलबली
कयाल के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई के बाद रानीगंज, आसनसोल और दुर्गापुर में खासा तनाव है। स्थानीय स्तर पर लोग इस बात को लेकर चकित हैं कि फिल्मों में पुरस्कार पाने वाला यह व्यक्ति इतने बड़े सिंडिकेट का मुखिया निकला। राजनीतिक गलियारों में भी खलबली है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि कयाल को वर्षों तक राजनीतिक संरक्षण मिला, तभी वह इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर पाया।

आगे की कार्रवाई और एजेंसी की रणनीति
ईडी ने कयाल के कई बैंकों, प्रोडक्शन हाउसों, संपत्तियों और कथित बेनामी कारोबारों की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने छापेमारी के दौरान कई डिजिटल डॉक्यूमेंट्स, अकाउंट बुक्स और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज़ जब्त किए हैं। आने वाले दिनों में कई और कारोबारियों और राजनीतिक व्यक्तियों से पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल कयाल अंडरग्राउंड बताया जा रहा है और ईडी उसकी तलाश में जुटी है। एजेंसी का दावा है कि यह जांच कोयला सिंडिकेट के काले साम्राज्य को पूरी तरह बेनकाब करेगी।














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