कुल्टी में तालाब पाटकर निर्माण, निगम ने दी सख्त चेतावनी

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कुल्टी :  आसनसोल महानगर में अवैध निर्माण को लेकर एक गंभीर मामला फिर चर्चा में आ गया। कुल्टी कॉलेज क्रॉसिंग के निकट जीटी रोड से सटे पुनुरी मौजा नंबर 740 की 92 एकड़ भूमि पर वर्षों से मौजूद एक बड़े तालाब को भरकर व्यावसायिक दुकानें खड़ी कर देने के आरोपों की पुष्टि नगर निगम की जांच में हो चुकी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आसनसोल नगर निगम ने सात नवंबर को अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी कर दिया था, जिसके अनुसार संबंधित दुकानदारों को 15 दिनों के भीतर निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

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नगर निगम की ओर से इस मामले में बोरो नंबर 9 के चेयरमैन चैतन्य माजी ने रविवार को एक प्रेस वार्ता कर पूरी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि मार्च माह में पहली शिकायत दर्ज कराई गई थी कि प्राकृतिक तालाब को मिट्टी डालकर पाटा जा रहा है और बाद में वहां मार्बल की दुकानें बनाई गई हैं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन, बीएलआरओ, एसडीएलआरओ और पुलिस विभाग ने संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि उक्त जमीन मूल रूप से तालाब श्रेणी में दर्ज है और उस पर किए गए निर्माण पूर्णतः अवैध हैं।

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जांच में अवैध निर्माण की पुष्टि

चैतन्य माजी ने बताया कि सरकारी अभिलेखों में भी भूमि जल-मग्न क्षेत्र (वाटरबॉडी) के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद बिना किसी अनुमति के उसे समतल कर दुकान बना दी गई। उन्होंने कहा कि किसी भी वाटरबॉडी को पाटना न केवल पर्यावरण संरक्षण के कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि नगर निगम अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध भी है।

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कई बार दुकान मालिकों को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस भेजा गया, परंतु किसी भी पक्षकार ने वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किए। न ही उन्होंने नगर निगम द्वारा दिए गए नवीनतम नोटिस का उत्तर भेजा है।

निगम की सख्त चेतावनी

नोटिस के अनुसार 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम स्वयं कार्रवाई कर अवैध निर्माण को ध्वस्त करेगा और उसका पूरा खर्च दुकानदारों से वसूला जाएगा। चैतन्य माजी ने कहा कि यह कदम आम जनता की शिकायत पर उठाया गया है और किसी भी स्थिति में जल स्रोतों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि शहर में कई स्थानों पर वर्षों पुराने जल स्रोतों को मिट्टी डालकर कब्जे की कोशिशें की जाती रही हैं। निगम इन सभी मामलों पर सख्त रुख अपनाए हुए है और जहां भी अवैध निर्माण पाया जाएगा, उसकी तुरंत नापजोख कर कार्रवाई की जाएगी।

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पर्यावरणीय नुकसान की आशंका

स्थानीय निवासियों का कहना है कि तालाब भरने से इलाके में जल निकासी की समस्या बढ़ गई है। बरसात के दिनों में सड़क और आसपास के घरों में पानी भर जाता है। उन्होंने नगर निगम के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जल स्रोतों को बचाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम है।

पर्यावरण कर्मियों ने भी चेतावनी दी है कि शहरों में इस तरह तालाबों को पाटकर व्यावसायिक निर्माण करने से भूमिगत जलस्तर पर गहरी चोट पड़ती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक स्रोतों का संरक्षण शहर की भविष्य सुरक्षा से जुड़ा मसला है।

अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा

फिलहाल नगर निगम की ओर से 15 दिन का अंतिम समय दिया गया है। इसके बाद कार्रवाई तय है। दुकान मालिकों की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे संकेत मिलता है कि मामला कानूनी टकराव की ओर बढ़ सकता है।

स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नगर निगम अपनी सख्ती जारी रखते हुए अवैध निर्माण पर अंकुश लगाएगा और तालाब सहित अन्य जल स्रोतों को संरक्षित रखेगा। आने वाले दिनों में निगम की कार्रवाई से स्पष्ट हो जाएगा कि शहर में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर प्रशासन कितना मुखर है।

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