आसनसोल : शनिवार को विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक हलचल और अधिक बढ़ गई। मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के आरोपों के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी वैध मतदाता को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि सरकार और संगठन दोनों इस प्रक्रिया पर लगातार नजर रखे हुए हैं और प्रत्येक योग्य नागरिक के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में उपस्थित पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे घर–घर संपर्क के माध्यम से मतदाताओं की सहायता करें। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में त्रुटियों का सुधार अवश्य होना चाहिए, परंतु इसका दुरुपयोग किसी नागरिक के अधिकार छीनने तक नहीं होना चाहिए।

राजनीतिक टकराव तेज
विपक्ष की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि सूची संशोधन के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इस आरोप का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि विपक्ष झूठ फैलाकर भय और भ्रम का वातावरण बना रहा है जबकि शासन और तृणमूल कांग्रेस दोनों स्थिति को पारदर्शी बनाने पर केंद्रित हैं।
उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग की ओर से बार–बार नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिससे आम मतदाता परेशान हो रहा है। उनका कहना था कि मतों की गणना से पूर्व मतदाता सूची को संदेहों से मुक्त रखना आवश्यक है, किंतु किसी के अधिकार के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
संगठन ने शुरू की निगरानी व्यवस्था
तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रत्येक क्षेत्र में विशेष हेल्पडेस्क, संपर्क शिविर और डिजिटल मॉनिटरिंग सेल बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक का नाम बिना कारण हटाया न जाए।
पार्टी नेताओं का कहना है कि कार्यकर्ता फॉर्म भरने, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और ऑनलाइन अपडेट करने में मतदाताओं की पूर्ण सहायता करेंगे। मंत्री ने दोहराया कि “संगठन, सरकार और जनता—तीनों मिलकर इस प्रक्रिया को न्यायपूर्ण बनाएंगे।”

जनता की चिंता और प्रतिक्रिया
स्थानीय स्तर पर कई नागरिकों ने शिकायत की कि उन्हें सूची में अपना नाम खोजने में कठिनाई हो रही है। कुछ मतदाताओं का कहना है कि उन्होंने वर्षों से मतदान किया है, फिर भी इस बार उनका नाम पंजीकृत सूची में मौजूद नहीं है।
इस पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि ऐसी सभी शिकायतें दर्ज की जाएंगी और समाधान सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि किसी वैध मतदाता का नाम हटना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है, और सरकार इस स्थिति को उत्पन्न नहीं होने देगी।
आगामी सप्ताह होगा निर्णायक
एसआईआर प्रक्रिया की अंतिम तिथि निकट होने के कारण राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज हो सकती हैं। संगठन, प्रशासन और विपक्ष की गतिविधियों पर आम जनता की पैनी नजर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की शुचिता और निष्पक्षता आने वाले विधानसभा चुनावों के परिणामों को गहराई से प्रभावित करेगी। इसलिए हर दल इस प्रक्रिया को अपनी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह केवल मतदाता सूची संशोधन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और विश्वास की परीक्षा है।














Users Today : 29
Users Yesterday : 37