आसनसोल : मंगलवार का दिन सड़क विवादों की वजह से खासा तनावपूर्ण रहा। कल्याणपुर सैटेलाइट टाउनशिप प्रोजेक्ट (केएसटीपी) रोड पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मामूली बात को लेकर दो पूलकार चालकों के बीच जमकर झगड़ा हो गया। देखते ही देखते बात गाली-गलौज से बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गई, और फिर अचानक ईंट-पत्थर भी चलने लगे। इस दौरान वहां से गुजर रहा एक स्कूली छात्र पत्थर की चपेट में आ गया, जिससे स्थानीय लोगों में रोष फैल गया।

घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पूलकार चालक स्कूली बच्चों को लेकर जा रहे थे, तभी पास से गुजरती एक कार उनकी गाड़ियों की तरफ तेज़ी से आई। अचानक एक पूलकार कार से टकराते-टकराते बच गई। इसी बात को लेकर दोनों ड्राइवर आपस में उलझ पड़े। कुछ ही पलों में विवाद बढ़ गया और दोनों ने मारपीट शुरू कर दी। इस बीच एक चालक ने झोंक में आकर ईंट उठाकर दूसरे की गाड़ी की तरफ फेंकी, जो गाड़ी में बैठे एक छात्र को लगी। छात्र को हल्की चोट लगी, लेकिन घटना ने माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। भीड़ ने दोनों चालकों को खूब फटकार लगाई, और छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। काफी देर तक हंगामे के बाद एक चालक ने हाथ जोड़कर माफी मांगी, जिसके बाद स्थिति शांत हो सकी। स्थानीय निवासियों का कहना था कि स्कूली वाहनों की मनमानी और लापरवाही लगातार बढ़ रही है, जिस पर सख्त निगरानी की जरूरत है।

इधर, मंगलवार दोपहर कालीपहाड़ी मोड़ पर एक और सड़क हादसा टलते-टलते बचा। रानीगंज से आ रही एक मिनी बस जब कालीपहाड़ी मोड़ पर पहुंची, उसी समय एक बाइक सवार भी सड़क पार कर रहा था। अचानक बस और बाइक के बीच हल्की टक्कर हो गई। हालांकि बड़ा हादसा टल गया, लेकिन बाइक सवार नाराज हो गया और बस चालक को बस से उतारकर मारपीट की चेतावनी देने लगा।
स्थिति बिगड़ते देख आसपास मौजूद लोग जुट गए। थोड़ी ही देर में ट्रैफिक पुलिस और सिविक वॉलेंटियर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराया और समझाया कि बात बढ़ाने से नुकसान और बढ़ेगा। काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों ने मामला आपसी सहमति से निपटाया और बस को आगे जाने दिया गया।

मंगलवार की ये दोनों घटनाएं आसनसोल में सड़क सुरक्षा और ड्राइविंग अनुशासन की वास्तविक स्थिति को उजागर करती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि स्कूली वाहनों, बसों और निजी ड्राइवरों द्वारा बढ़ती लापरवाही पर नकेल कसना बेहद जरूरी हो गया है। उनका कहना है कि सड़कों पर जोखिम बढ़ रहा है और प्रशासन को सख्ती दिखाते हुए नियमित निगरानी बढ़ानी चाहिए, ताकि ऐसे तनावपूर्ण हालात दोबारा न बनें।














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