रूपनारायणपुर : क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से लगातार सांपों के रेस्क्यू की घटनाएँ सामने आ रही हैं, लेकिन मंगलवार को एक ऐसी प्रजाति ने स्थानीय लोगों और वन विभाग का ध्यान विशेष रूप से खींचा, जिसे आमतौर पर इस इलाके में नहीं पाया जाता। पिठाकियारी पानी की टंकी के पास स्थित छाया घोष के आवासीय परिसर के बगीचे में एक दुर्लभ प्रजाति का सांप दिखाई दिया, जिसके बाद इलाके में हल्की दहशत फैल गई।

बगीचे में दिखा यह सांप “कॉमन सैंड बोआ” प्रजाति का था, जो सामान्यतः रेतीले क्षेत्रों में पाया जाता है और मानवों के लिए बिल्कुल हानिरहित माना जाता है। स्थानीय निवासी असीम घोष ने बिना किसी नुकसान के इस सैंड बोआ को पकड़कर सुरक्षित रेस्क्यू किया। उनकी सहायता युवक चीकू ने भी की, जिसने सांप को सुरक्षित बाहर निकालने में पूरा सहयोग दिया।

करीब तीन फीट लंबा और भारी शरीर वाला यह सैंड बोआ काफी धीमी गति से चलता है। इसकी यही विशेषता इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती है। रेस्क्यू टीम के प्रयास के बाद तुरंत ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को सूचना दी गई, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे।
रेंज ऑफिसर बिस्वजीत सिकदर ने निरीक्षण के दौरान बताया कि सैंड बोआ इस इलाके में प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता। उन्होंने आशंका जताई कि संभवतः रेत की ट्रांसपोर्टेशन के दौरान यह सांप किसी बालू लदे वाहन में अनजाने में यहाँ पहुंच गया होगा। उन्होंने कहा, “यह प्रजाति सामान्यतः रेत में ही रहती है। इस तरह के सांप बिल्कुल हानिरहित होते हैं और इनका स्वभाव बहुत शांत होता है। यह अच्छी बात है कि स्थानीय लोगों ने घबराने के बजाय इसे सुरक्षित बचाने का प्रयास किया।”
वन विभाग ने बताया कि सैंड बोआ एक संरक्षित प्रजाति है और इसका प्राकृतिक आवास बहुत सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है। ऐसे में इसे संरक्षित रखकर सही वातावरण में छोड़ना आवश्यक है। अधिकारी ने पुष्टि की कि सांप को फिलहाल वन विभाग की निगरानी में रखा गया है और उसे उचित पुनर्वास प्रक्रिया के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा।

स्थानीय निवासी भी असीम घोष की तत्परता और समझदारी की प्रशंसा कर रहे हैं। क्षेत्र में रेंजर सिकदर की टीम ने भी लोगों को यह संदेश दिया कि सांप दिखाई देने पर घबराकर उसे नुकसान न पहुंचाएँ बल्कि वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू वालंटियर से संपर्क करें।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि जागरूकता और सही जानकारी के सहारे किसी भी वन्यजीव को बिना नुकसान पहुँचाए बचाया जा सकता है। रूपनारायणपुर में इस दुर्लभ सैंड बोआ के रेस्क्यू को स्थानीय लोग एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।














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