दुर्गापुर इस्पात नगर में करंट हादसे ने बढ़ाई सुरक्षा चिंताएं

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दुर्गापुर :- इस्पात नगर के भारती रोड क्षेत्र में गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बिजली मरम्मत कार्य के दौरान दो ठेका श्रमिक अचानक करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना ने न सिर्फ स्थानीय निवासियों को दहशत में डाल दिया, बल्कि दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (DISL) की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों श्रमिक—सुदीप्त हल्दर और विधान मांझी—बिजली लाइन पर मरम्मत से जुड़े नियमित कार्य में लगे हुए थे। लाइन को बंद बताकर काम शुरू करवाया गया था, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद अचानक बिजली सप्लाई बहाल कर दी गई। इससे दोनों को जबर्दस्त झटका लगा और वे वहीं गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों और अन्य सहकर्मियों ने तुरंत उन्हें उठाया और नजदीकी अस्पताल पहुँचाया।

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वर्तमान में दोनों घायल श्रमिक विधाननगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहाँ डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर है, लेकिन खतरे से बाहर बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि काम के दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा गाइडलाइन न दी गई और न ही DISL प्रबंधन की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद था।

प्रबंधन पर बरसा श्रमिक संगठन का गुस्सा

इस हादसे के बाद तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संगठन INTUC ने संयंत्र प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। संगठन के वरिष्ठ नेता मानस अधिकारी ने आरोप लगाया कि—“बिजली मरम्मत का यह पूरा काम बिना उचित अनुमति और ठोस सुरक्षा व्यवस्था के कराया जा रहा था। जिस अधिकारी के निर्देश पर बिजली सप्लाई बहाल की गई, उसकी पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह सीधे-सीधे मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगा।

निवासियों ने भी उठाए सुरक्षा मानकों पर सवाल

भारती रोड इलाके के लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में अक्सर बिजली मरम्मत और केबल कार्य अव्यवस्थित ढंग से किए जाते हैं।“कर्मचारियों के पास न सुरक्षा उपकरण होते हैं, न ही काम के दौरान कोई तकनीकी सुपरविजन। ऐसी घटना होना सिर्फ समय की बात थी,”स्थानीय निवासी तapan दे ने कहा।

पुलिस जांच शुरू — सुरक्षा प्रोटोकॉल की पड़ताल करेगी टीम

घटना के बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मरम्मत कार्य के दौरान लाइन बंद करने का प्रमाणित रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। पुलिस उन अधिकारियों की भी सूची तैयार कर रही है, जिनके निर्देशन में यह काम चल रहा था।एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया—“इमारतों, उद्योग क्षेत्रों और बिजली प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। यदि इसमें किसी भी प्रकार की चूक पाई गई, तो कानूनी कार्रवाई तय है।”

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DISL प्रबंधन मौन – कर्मचारियों में नाराजगी

घटना को लेकर जहाँ कर्मचारियों में भारी असंतोष है, वहीं DISL प्रबंधन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। संयंत्र के श्रमिकों का कहना है कि जब भी इस तरह की घटनाएँ होती हैं, प्रबंधन कार्रवाई का आश्वासन तो देता है, लेकिन वास्तविक सुधार दिखाई नहीं देता।संगठन नेताओं का कहना है कि—“काम शुरू होने से पहले लाइन बंद है या नहीं, इसका क्रॉस चेक होना चाहिए। हेलमेट, ग्लव्स, इंसुलेटेड बेल्ट जैसे बुनियादी उपकरण भी कई बार नहीं दिए जाते।”

घटना ने बड़ा सवाल छोड़ दिया

यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि क्या औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है? श्रमिकों की सुरक्षा के लिए बनाए नियमों का पालन कौन सुनिश्चित करता है? और कब तक श्रमिक अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर रहेंगे?फिलहाल दोनों घायल मजदूर अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं और उनके सहकर्मी न्याय और सुरक्षा की मांग का झंडा उठाए खड़े हैं।

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