आसनसोल : शुक्रवार को बीबी कॉलेज परिसर में महिला उद्यमियों को संगठित कारोबारी ढांचे से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष उद्यम पंजीकरण शिविर आयोजित किया गया। कॉलेज के एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट, इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर स्वावलंबन की ओर से हुए इस कार्यक्रम में स्थानीय महिला उद्यमियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। शिविर का मुख्य लक्ष्य असंगठित रूप से काम कर रहीं महिलाओं को एमएसएमई पंजीकरण की सुविधा प्रदान करना था, ताकि वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ ले सकें।

इस पंजीकरण शिविर को जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी), पश्चिम बर्दवान की टीम ने संचालित किया। सहायक निदेशक उत्तम लाहा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल ने सुबह से लेकर शाम तक प्रतिभागियों के दस्तावेजों की जाँच की और पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया पूरी कराई। शिविर में 50 महिला उद्यमियों को उद्यम प्रमाणपत्र जारी हुआ, जिससे उनका व्यावसायिक कामकाज अब औपचारिक और प्रमाणित श्रेणी में शामिल हो गया है।

कार्यक्रम में कुल 80 से अधिक महिला उद्यमियों ने पंजीकरण कराने के लिए उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि, कई महिलाएँ अधूरे दस्तावेज या गलत जानकारी के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकीं। इस संबंध में स्वावलंबन की ओर से आश्वासन दिया गया कि उन्हें अगले चरण में अलग तिथि देकर पुनः पंजीकरण पूरा करवाया जाएगा। संस्था के सदस्यों का कहना था कि कई बार जानकारी के अभाव में महिला उद्यमी लाभकारी योजनाओं से वंचित रह जाती हैं, इसलिए इस तरह के शिविर उनकी मदद करने में अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं।
बीबी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अमिताभ बसु ने इस आयोजन को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि कॉलेज भविष्य में भी इसी तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले दिनों में सरकार की विभिन्न सब्सिडी आधारित क्रेडिट योजनाओं पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिससे उद्यमी महिलाओं को वित्तीय सहायता प्राप्त करने की सही प्रक्रिया और अवसरों की जानकारी मिल सके।

शिविर के सफल संचालन में कॉलेज के दो छात्र स्वयंसेवक—राखी यादव और गौनी गोस्वामी—ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। दस्तावेजों की जाँच, पंजीकरण की लाइन व्यवस्था और प्रतिभागियों को प्रक्रिया समझाने में दोनों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
स्वावलंबन की टीम ने बताया कि सरकार की ओर से छोटे, सूक्ष्म और कुटीर उद्योगों के लिए अनेक योजनाएँ उपलब्ध हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के चलते महिलाओं की पहुँच इन योजनाओं तक नहीं हो पाती। इसलिए संस्था लगातार कैंप, कार्यशालाएँ और परामर्श सत्र आयोजित कर रही है, ताकि अधिक से अधिक महिला उद्यमी औपचारिक MSME ढांचे में शामिल होकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।















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