दुर्गापुर : शनिवार को दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) की भूमि पर बसे लोगों का आक्रोश एक बार फिर सतह पर आ गया। दुर्गापुर के डीटीपीएस क्षेत्र अंतर्गत अर्जुनपुर (डांगपाड़ा) बस्ती में वर्षों से रह रहे परिवारों ने जमीन खाली कराने पहुंचे डीवीसी अधिकारियों के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया। देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए और प्रशासन को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी।

शनिवार सुबह जैसे ही डीवीसी के अधिकारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के इरादे से बस्ती में पहुंचे, स्थानीय लोग एकजुट होकर सामने आ गए। बस्ती की महिलाओं ने हाथों में झाड़ू लेकर प्रतीकात्मक लेकिन आक्रामक विरोध किया। उनका साफ संदेश था—बिना पुनर्वास कोई भी अपने घर नहीं छोड़ेगा। महिलाओं के साथ पुरुष और बुजुर्ग भी सड़क पर बैठ गए, जिससे अधिकारियों का आगे बढ़ना संभव नहीं हो सका।
बस्तीवासियों का कहना है कि वे दशकों से इसी जमीन पर रह रहे हैं। यहां उनके घर ही नहीं, बल्कि रोजी-रोटी, सामाजिक संबंध और जीवन की पूरी संरचना जुड़ी हुई है। अचानक जमीन खाली कराने का प्रयास उन्हें बेघर करने जैसा है। लोगों का तर्क है कि यदि विकास परियोजना जरूरी है, तो पहले वैकल्पिक आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के साथ पुनर्वास की ठोस योजना दी जाए। इसके बाद ही वे किसी निर्णय पर विचार करेंगे।
विरोध के तेवर इतने सख्त थे कि डीवीसी अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया फिलहाल रोकनी पड़ी। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बस्तीवासी अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।

डीवीसी की ओर से इस मामले में वरिष्ठ महाप्रबंधक अमित मोदी ने कहा कि अर्जुनपुर क्षेत्र में 800 मेगावाट क्षमता का नया ताप विद्युत केंद्र स्थापित करने की योजना है। यह परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से अहम है, बल्कि इससे क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की भी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन स्थानीय विरोध के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा।
अमित मोदी ने चिंता जताई कि यदि इसी तरह की रुकावटें बनी रहीं, तो परियोजना की समय-सीमा प्रभावित होगी। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी स्थिति में डीवीसी को इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए वैकल्पिक स्थान पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निगम बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में है।

दूसरी ओर, बस्तीवासियों का कहना है कि विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि पहले भी कई परियोजनाओं में पुनर्वास के वादे अधूरे रह गए, जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इसलिए इस बार वे लिखित और व्यावहारिक आश्वासन के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
शनिवार को पूरे घटनाक्रम के दौरान माहौल बेहद संवेदनशील बना रहा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में डीवीसी, जिला प्रशासन और बस्ती प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक की संभावना है। उद्देश्य यही है कि किसी टकराव के बिना ऐसा समाधान निकाला जाए, जिसमें विकास परियोजना भी आगे बढ़े और वर्षों से बसे परिवारों को सुरक्षित पुनर्वास भी मिले।
फिलहाल अर्जुनपुर बस्ती में अनिश्चितता का माहौल है। एक ओर बिजली उत्पादन जैसी बड़ी परियोजना का दबाव है, तो दूसरी ओर अपने घर-आंगन को बचाने की जिद। यह टकराव अब सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि विकास और मानवीय संवेदना के संतुलन का सवाल बन गया है।















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