आसनसोल : पश्चिम बंगाल में जारी “बांग्ला बचाओ” अभियान ने पश्चिम बर्दवान जिले में व्यापक जनभागीदारी के साथ नई ऊर्जा दिखाई। राज्यव्यापी इस मार्च की शुरुआत कूचबिहार से हुई थी, जो विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से गुजरते हुए अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। रविवार को इस अभियान का समापन सांकटोरिया से चित्तरंजन तक के पदयात्रा मार्ग पर निर्धारित किया गया, जहां बड़ी संख्या में मेहनतकश लोग, कर्मचारी, छात्र और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।

सुबह करीब साढ़े नौ बजे डेंडुआ से मार्च की औपचारिक शुरुआत हुई। प्रारंभिक सभा में सुजीत भट्टाचार्य ने संक्षिप्त संबोधन करते हुए कहा कि बांग्ला भाषा, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा केवल सांस्कृतिक प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और अधिकारों से भी जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने आम लोगों से इस आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने की अपील की।
मार्च आगे बढ़ते हुए जेमारी अल्लादी डाबरमोर पहुंचा, जहां एक और छोटी सभा का आयोजन किया गया। यहां वक्ताओं ने कहा कि भाषा और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है, और उसे कमजोर करने के प्रयासों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि यह मार्च किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी पहचान और विरासत के संरक्षण के लिए है।

मार्च के दौरान गणेश पंडित, अबीर घोष, राजीव गुप्ता और सीपीआई(एम) के जिला सचिव गौरांग चटर्जी ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि बांग्ला भाषा को शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में उसका उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मेहनतकश वर्ग की आवाज और उनकी सांस्कृतिक पहचान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पूरे मार्ग में नारे, पोस्टर और बैनरों के माध्यम से लोगों ने अपनी बात रखी। अनुशासन के साथ निकले इस जुलूस में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। स्थानीय इलाकों में लोगों ने मार्च का स्वागत किया और कई स्थानों पर समर्थन भी जताया।















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