अदालती आदेश पर बैंक की कार्रवाई, कुल्टी का पाइप कारखाना सील

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कुल्टी :  मंगलवार को कुल्टी क्षेत्र में बैंकिंग और औद्योगिक जगत से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया, जब जीटी रोड के समीप स्थित एक निजी पाइप निर्माण इकाई पर बैंक ने विधिवत कब्जा कर लिया। आसनसोल जिला अदालत के स्पष्ट निर्देश के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई, जिसे लेकर पूरे इलाके में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।

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जानकारी के अनुसार, कुल्टी के कुलतोड़ जीटी रोड के पास स्थित दिव्यायाम पाइप एंड ट्यूब्स नामक निजी कारखाना लंबे समय से वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ चल रहा था। बैंक सूत्रों का कहना है कि कारखाना प्रबंधन द्वारा लिए गए ऋण की अदायगी समय पर नहीं की गई, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद आसनसोल जिला अदालत ने संबंधित बैंक को कारखाने पर कब्जा लेने की अनुमति प्रदान की।

मंगलवार सुबह इंडियन बैंक की टीम आवश्यक दस्तावेजों के साथ कारखाना परिसर पहुंची। किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे। बैंक अधिकारियों ने अदालत के आदेश को पढ़कर सुनाया और इसके बाद विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत फैक्ट्री परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया गया।

कार्रवाई के दौरान कारखाने के मुख्य द्वार पर बैंक द्वारा नोटिस चस्पा किया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि यह संपत्ति अब बैंक के अधीन है। फैक्ट्री के अंदर मौजूद मशीनरी, कच्चे माल और अन्य परिसंपत्तियों का प्राथमिक निरीक्षण भी किया गया। बैंक अधिकारियों ने बताया कि आगे की प्रक्रिया अदालत और बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी, जिसमें संपत्ति का मूल्यांकन और नीलामी की संभावना भी शामिल है।

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इस घटनाक्रम से स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र में हलचल देखी गई। आसपास के कारखाना कर्मियों और स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। कुछ लोगों ने इसे औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय दबाव का संकेत बताया, जबकि कुछ का कहना था कि समय पर कर्ज अदायगी न होने का यह स्वाभाविक परिणाम है।

हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह के विरोध या तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी के कारण पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। पुलिस का कहना है कि अदालत के आदेश के पालन में प्रशासन ने केवल सहयोग की भूमिका निभाई है।

बैंक प्रबंधन की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि यदि भविष्य में बकाया राशि के निपटारे को लेकर कोई वैधानिक समाधान सामने आता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल, कारखाना परिसर बैंक के कब्जे में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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