शिल्पांचल में फिर सक्रिय कोल सिंडिकेट, सीआईएसएफ की कार्रवाई तेज

Facebook
Twitter
WhatsApp

आसनसोल :  शिल्पांचल क्षेत्र में कोयला तस्करी एक बार फिर बेखौफ अंदाज में सिर उठाती नजर आ रही है। बंगाल–झारखंड सीमा से सटे इलाकों में कोल सिंडिकेट के दोबारा सक्रिय होने के संकेत हाल की घटनाओं से साफ दिखाई देने लगे हैं। शुक्रवार को जामुड़िया थाना क्षेत्र में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की कार्रवाई ने इस अवैध कारोबार की गहराई और संगठित स्वरूप को फिर उजागर कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों ने कोयला तस्करी के खिलाफ अभियान चलाते हुए एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की, जिसमें अवैध रूप से लदा कोयला पाया गया।

IMG 20240918 WA0025

इससे पहले कुल्टी थाना क्षेत्र के चौरंगी इलाके में बड़े पैमाने पर चोरी के कोयले का भंडारण पकड़ा गया था। इन लगातार हो रही कार्रवाइयों ने यह संकेत दे दिया है कि शिल्पांचल में कोयला तस्करी केवल छिटपुट घटनाएं नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क के तहत संचालित हो रही है। सूत्रों का दावा है कि कोल सिंडिकेट ने एक बार फिर अपने पुराने ढर्रे पर काम शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि बीते महीने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल और झारखंड में कोयला और बालू माफियाओं के खिलाफ दो दिन तक एक साथ बड़ी छापेमारी की थी। इस दौरान 44 से अधिक ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी, जिनमें शिल्पांचल के एक दर्जन से ज्यादा स्थान शामिल थे। ईडी की इस कार्रवाई में करीब 14 करोड़ रुपये नकद, छह करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने के आभूषण, डिजिटल उपकरण, जमीन से जुड़े दस्तावेज और कई अहम कागजात बरामद किए गए थे। जांच में केके–एलबी नेक्सस का खुलासा हुआ था, जिससे यह साफ हुआ कि कोयला तस्करी का यह खेल केवल अपराधियों तक सीमित नहीं, बल्कि कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर संरक्षण के साथ चल रहा था।

ईडी की जांच के दायरे में कोल सिंडिकेट से जुड़े कई नामचीन चेहरे सामने आए थे, जिनमें कृष्ण मुरारी कयाल उर्फ बिल्लू उर्फ केके, लोकेश सिंह, शशि यादव, नारायण नंदा उर्फ नरेन खड़का, परवेज सिद्दीकी, युधिष्ठिर घोष, लाल बहादुर सिंह उर्फ एलबी सिंह, कुंभनाथ सिंह, अरविंद सिंह और नरेश गोयल जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा गोदावरी और डेको जैसी बड़ी कंपनियों के परिसरों में भी तलाशी ली गई थी। फिलहाल इस पूरे नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियों की पड़ताल जारी है।

इन सबके बीच अब सीआईएसएफ ने भी कोयला तस्करी पर नकेल कसने की दिशा में कदम तेज किए हैं। जामुड़िया थाना क्षेत्र के दोमानी गांव (दुर्माडांगा) में बुधवार देर रात करीब 11:35 बजे शिवपुर मंदिर के पास एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोका गया। जांच में सामने आया कि उसमें लगभग चार मीट्रिक टन अवैध कोयला लदा हुआ था। सीआईएसएफ की टीम ने तत्काल वाहन को जब्त कर लिया, हालांकि अंधेरे का फायदा उठाकर चालक मौके से फरार हो गया। बाद में जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉली को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए जामुड़िया थाना सौंप दिया गया।

IMG 20250511 WA0050

सूत्रों के मुताबिक, कुल्टी, रानीगंज, जामुड़िया, बाराबनी और पांडवेश्वर जैसे इलाके कोल सिंडिकेट के लिए फिर से ‘हार्डकोर जोन’ बनते जा रहे हैं। अवैध डिपो बनाकर कोयले का स्टॉक जमा किया जा रहा है और रात के अंधेरे में इसे सुरक्षित रास्तों से बाहर भेजा जा रहा है। हाईवे और संपर्क मार्गों पर सिंडिकेट के गुर्गे तैनात रहते हैं, जो हर गतिविधि पर नजर रखते हैं।

स्थिति यह है कि कुछ क्षेत्रों में दिनदहाड़े भी कोयला चोरी की तस्वीरें आम हो चुकी हैं। रानीगंज इलाके में सुबह के समय साइकिल और वैन पर खुलेआम कोयला ढोते दृश्य देखे जा रहे हैं। नारायणकुड़ी और एगरा ओसीपी से चोरी किया गया कोयला ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बीच सड़कों से होते हुए डिपो तक पहुंचाया जा रहा है। इसी तरह की हालात शिल्पांचल के अन्य थाना क्षेत्रों में भी बताई जा रही है।

इसके अलावा सिंडिकेट के लोग डीओ होल्डरों और वाहन मालिकों से डराने-धमकाने के जरिए रंगदारी वसूली कर रहे हैं। कुल मिलाकर, कोल सिंडिकेट एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में लौटता नजर आ रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सुरक्षा एजेंसियों और जांच संस्थाओं की कार्रवाई इस संगठित तस्करी पर स्थायी लगाम लगा पाएगी, या फिर शिल्पांचल में अवैध कोयला कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा।

Leave a Comment

Leave a Comment

What does "money" mean to you?
  • Add your answer

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 3 3 5 2 3
Users Today : 6
Users Yesterday : 37