बर्नपुर। सेल : आईएसपी परिसर में श्रमिक असंतोष एक बार फिर खुलकर सामने आया, जब इंटक से संबद्ध आसनसोल आयरन एंड स्टील वर्कर्स यूनियन तथा ठेकेदार मजदूर कांग्रेस ने स्कोब गेट के सामने जोरदार गेट मीटिंग का आयोजन किया। इस सभा में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कोड के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया गया और इन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की गई। साथ ही आईएसपी को कथित रूप से निजीकरण की दिशा में ले जाने के प्रयासों की कड़े शब्दों में आलोचना की गई।

सभा को संबोधित करते हुए इंटक नेताओं ने कहा कि सेल–आईएसपी जैसे सार्वजनिक उपक्रम देश की औद्योगिक रीढ़ हैं और इन्हें कमजोर करने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा। नेताओं का आरोप था कि आईएसपी से जुड़े स्कूल, अस्पताल और अन्य सामाजिक इकाइयों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है, जो श्रमिकों और उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन योजनाओं को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
श्रमिकों की लंबित मांगें बनीं मुद्दा
गेट मीटिंग में श्रमिकों की वर्षों से लंबित मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन नेताओं ने 39 माह के बकाया एरियर, एचआरए, नाइट अलाउंस सहित अन्य वित्तीय लाभों के भुगतान में हो रही देरी पर सेल प्रबंधन को घेरा। वक्ताओं ने कहा कि उत्पादन और मुनाफे में योगदान देने वाले मजदूरों को उनका हक समय पर नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रबंधन से मांग की गई कि इन मुद्दों पर शीघ्र ठोस निर्णय लिया जाए।
“श्रमिक अधिकारों पर सीधा हमला”
यूनियन अध्यक्ष हरजीत सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस तरह सेना में अग्निवीर योजना लाई गई, उसी तर्ज पर अब सरकारी कारखानों में भी “श्रमिक वीर” जैसी अवधारणा थोपने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, चार श्रम कोड श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर करने का माध्यम बन गए हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों के हितों की अनदेखी कर केवल पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।

प्रबंधन पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप
यूनियन के महासचिव विप्लव माझी ने कहा कि सेल प्रबंधन अपनी सामाजिक और औद्योगिक जिम्मेदारियों से लगातार पीछे हटता जा रहा है। अस्पताल, स्कूल और कल्याणकारी सुविधाओं को निजीकरण की ओर धकेलना इसका उदाहरण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने समय रहते रुख नहीं बदला, तो श्रमिक संगठन चरणबद्ध आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे।
एकजुटता का प्रदर्शन
गेट मीटिंग में बड़ी संख्या में श्रमिकों और यूनियन पदाधिकारियों की मौजूदगी ने संगठन की एकजुटता को दर्शाया। ठेकेदार मजदूर कांग्रेस के नेताओं ने भी मंच से चार श्रम कोड और निजीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद की। वक्ताओं ने कहा कि स्थायी और ठेका मजदूरों के बीच भेदभाव समाप्त कर समान अधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
सभा में इंटक यूनियन के अध्यक्ष हरजीत सिंह, महासचिव विप्लव माझी, सचिव विवेकानंद कुमार सहित ठेकेदार मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष विजय सिंह, महासचिव अजय राय समेत अनेक नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक श्रमिकों की मांगें पूरी नहीं होंगी और सार्वजनिक उपक्रमों की रक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।यह गेट मीटिंग न केवल श्रमिक असंतोष का प्रतीक बनी, बल्कि यह संकेत भी दे गई कि आईएसपी में श्रम अधिकारों और निजीकरण के मुद्दे आने वाले दिनों में और तीखे हो सकते हैं।















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