आसनसोल : डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और आम लोगों को ऑनलाइन ठगी से सतर्क करने के उद्देश्य से शनिवार को आसनसोल के ऊषाग्राम स्थित एक निजी मैरिज हॉल में विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आसनसोल–दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के अपराध निरोधक विभाग की पहल पर तथा बजाज फाइनेंस लिमिटेड के सहयोग से संपन्न हुआ। शिविर में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं और विभिन्न पेशे से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में सब-इंस्पेक्टर असीम समुई, सब-इंस्पेक्टर गौतम कर्मकार तथा लालबाजार के सेवानिवृत्त आईजी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सरल भाषा में बताया कि आज के समय में साइबर अपराध किस तरह नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं और थोड़ी-सी लापरवाही कैसे भारी आर्थिक नुकसान में बदल सकती है।
युवाओं और सोशल मीडिया यूजर्स पर विशेष फोकस
पुलिस अधिकारियों ने खासतौर पर युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी, जो सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक सक्रिय रहते हैं। बताया गया कि साइबर अपराधी फर्जी प्रोफाइल, आकर्षक ऑफर, लॉटरी, नौकरी या निवेश के झांसे देकर पहले भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। एक बार निजी जानकारी हाथ लगते ही ठग ब्लैकमेलिंग या आर्थिक ठगी को अंजाम देते हैं।

डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए हथकंडों से सावधान
सब-इंस्पेक्टर असीम समुई ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करते हैं और डर का माहौल बनाते हैं। कभी पार्सल में ड्रग्स मिलने का आरोप, तो कभी एटीएम या बैंक अकाउंट ब्लॉक होने की धमकी देकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के दावे पूरी तरह फर्जी होते हैं और इनका कोई कानूनी आधार नहीं होता। पुलिस या सरकारी एजेंसियां कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देतीं और न ही ओटीपी या बैंक डिटेल मांगती हैं।

पढ़े-लिखे और संपन्न लोग भी बन रहे शिकार
अधिकारियों ने यह भी बताया कि साइबर ठग केवल कम पढ़े-लिखे लोगों को ही नहीं, बल्कि समाज में प्रतिष्ठित, संपन्न और शिक्षित वर्ग को भी निशाना बनाते हैं। कारण यह है कि ऐसे लोग जल्दी भरोसा कर लेते हैं और अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के डर से किसी से सलाह लिए बिना ही ठगों की बातों में आ जाते हैं।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
शिविर में लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी गई—
किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ई-मेल पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें।ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।लालच भरे ऑफर, इनाम या धमकी भरे कॉल से सतर्क रहें।किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल में सूचना दें।
समाज की भागीदारी जरूरी
लालबाजार के सेवानिवृत्त आईजी ने कहा कि साइबर अपराध केवल पुलिस की समस्या नहीं है, बल्कि इससे निपटने के लिए समाज की जागरूकता और सहभागिता बेहद जरूरी है। जितनी अधिक जानकारी लोगों के पास होगी, उतना ही ठगों के लिए लोगों को फंसाना मुश्किल होगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और ऐसे जागरूकता शिविर नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की। शनिवार का यह आयोजन इस बात का संकेत बना कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता ही डिजिटल ठगी के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार है।















Users Today : 5
Users Yesterday : 37