दुर्गापुर : शनिवार को दुर्गापुर के ऐतिहासिक कल्पतरु मेले की तैयारियों पर एक बार फिर सियासी खींचतान का असर साफ नजर आया। खूंटी पूजा के साथ जिस उत्साह और उम्मीद के साथ मेले की औपचारिक शुरुआत की गई थी, उसी उत्साह पर अब राजनीतिक गुटबाजी की छाया गहराने लगी है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच जारी अंदरूनी टकराव के कारण स्टाल बुकिंग की प्रक्रिया एक बार फिर पूरी तरह रुक गई, जिससे मेला मैदान में तनाव का माहौल बन गया।

कल्पतरु मेला न सिर्फ दुर्गापुर बल्कि पूरे औद्योगिक अंचल की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। हर वर्ष इस मेले से हजारों छोटे-बड़े व्यापारियों, कारीगरों और स्थानीय लोगों की आजीविका जुड़ी रहती है। लेकिन इस बार मेले से पहले ही विवादों की शुरुआत हो चुकी है। इससे पहले भी आपसी मतभेदों के चलते स्टाल बुकिंग को रोकना पड़ा था। स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए पुलिस बल तैनात किया, जिसके बाद शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच बुकिंग दोबारा शुरू कराई गई थी।

शनिवार को फिर बिगड़ी स्थिति
शनिवार सुबह जैसे ही स्टाल बुकिंग की प्रक्रिया शुरू हुई, हालात अचानक बिगड़ गए। आरोप है कि तृणमूल के एक अन्य गुट से जुड़े कुछ लोग बुकिंग काउंटर पर पहुंचे और वहां हंगामा करने लगे। देखते ही देखते स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दुर्गापुर नगर निगम (डीएमसी) के कर्मचारी, जो बुकिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उन्हें काउंटर छोड़कर हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद बुकिंग का काम पूरी तरह ठप हो गया।
व्यापारियों में आक्रोश
बुकिंग के लिए दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान नजर आए। कई व्यापारी सुबह से ही लाइन में खड़े थे और उन्हें उम्मीद थी कि इस बार उन्हें स्टाल मिल जाएगा। लेकिन अचानक बुकिंग रुकने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन और मेला प्रबंधन की ओर से बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात काबू में नहीं हैं। कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो मेले का भविष्य ही खतरे में पड़ सकता है।

मेला कमेटी की नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कल्पतरु मेला कमेटी के सचिव ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी तत्वों द्वारा जानबूझकर स्टाल बुकिंग की प्रक्रिया में बाधा डाली जा रही है। कर्मचारियों को डराने-धमकाने की भी शिकायत सामने आई है। हालांकि, उन्होंने किसी राजनीतिक दल या गुट का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस पूरे विवाद को सत्तारूढ़ दल की अंदरूनी कलह से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी
शनिवार को हुई इस ताजा घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, हालात को देखते हुए मेला परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस बल की संख्या बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सभी पक्षों के साथ बैठक कर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
मेले के भविष्य पर सवाल
बार-बार स्टाल बुकिंग रुकने से न केवल व्यापारियों में असंतोष बढ़ रहा है, बल्कि आम लोगों में भी यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस बार कल्पतरु मेला अपने तय समय और भव्यता के साथ आयोजित हो पाएगा। राजनीतिक गुटबाजी के चलते यदि तैयारियां इसी तरह प्रभावित होती रहीं, तो इसका सीधा असर मेले की प्रतिष्ठा और आयोजन पर पड़ सकता है।















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