नई पार्टी के ऐलान से बंगाल की राजनीति में हलचल

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कोलकाता :  सोमवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ उस समय सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी के गठन की औपचारिक घोषणा कर दी। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ रखा है। इस घोषणा के साथ ही 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं और राजनीतिक समीकरणों में संभावित बदलाव की अटकलें शुरू हो गई हैं।

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हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनकी पार्टी का मूल उद्देश्य आम जनता के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देना है। उन्होंने कहा कि पार्टी का नाम ही उसके उद्देश्य को स्पष्ट करता है। ‘उन्नयन’ शब्द का अर्थ किसी भी व्यवस्था, समाज या स्थिति को बेहतर बनाना होता है और उनकी पार्टी इसी सोच के साथ आगे बढ़ेगी। हालांकि पार्टी का नाम अंतिम रूप से चुनाव आयोग द्वारा स्वीकृत किया जाएगा।

पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर भी हुमायूं कबीर ने अपनी प्राथमिकताएं सार्वजनिक कीं। उन्होंने कहा कि उनकी पहली पसंद ‘टेबल’ चुनाव चिह्न है, जबकि दूसरी पसंद ‘ट्विन रोजेज’ है। चुनाव आयोग जो भी चिह्न आवंटित करेगा, उसी के अनुरूप पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी।

हुमायूं कबीर ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि उनके पास संगठनात्मक ताकत और जनसमर्थन जुटाने की क्षमता है। फिलहाल कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा जल्द किए जाने की बात भी उन्होंने कही।

अपनी राजनीतिक सोच को स्पष्ट करते हुए हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि अब तक सत्ताधारी दलों ने खासकर अल्पसंख्यक समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को कई बुनियादी अधिकारों और विकास के अवसरों से वंचित रखा गया है। जनता उन्नयन पार्टी इन वर्गों की आवाज बनने और उनके हक के लिए संघर्ष करने का दावा करती है।

उन्होंने कहा कि इस समय भले ही लोग उन्हें गंभीरता से न ले रहे हों, लेकिन आने वाले दिनों में जनता को यह एहसास होगा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य क्या है। हुमायूं कबीर ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि उनकी पहचान किसी दल या व्यक्ति की मोहताज नहीं है, बल्कि वे अपनी नीतियों और विचारों के बल पर जनता के बीच जाएंगे।

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इससे पहले, हुमायूं कबीर ने सोमवार को ही तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों के विरोधी दलों से एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यदि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में मौजूदा सरकार को चुनौती देनी है, तो सभी विरोधी ताकतों को मिलकर एक बड़े गठबंधन के रूप में चुनाव लड़ना चाहिए। उनका कहना था कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर राज्य के भविष्य के बारे में सोचना होगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई दल खुद को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए गठबंधन में समानता का व्यवहार नहीं करता, तो जनता उन्नयन पार्टी अकेले चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि उनकी पार्टी किसी दबाव में फैसले नहीं लेगी और हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुमायूं कबीर की नई पार्टी का गठन 2026 के चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है, वहां इस पार्टी का असर देखने को मिल सकता है।

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