लंबित मांगों पर अड़ीं आशा कर्मी, मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल

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आसनसोल :  नगर निगम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कर्मियों का सब्र अब जवाब दे गया है। वर्षों से लंबित मांगों और बार-बार अनदेखी से आहत आशा कर्मियों ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी। इस ऐलान के साथ ही आसनसोल नगर निगम और स्वास्थ्य प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि हड़ताल का सीधा असर शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।

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सोमवार को बड़ी संख्या में आशा कर्मी आसनसोल नगर निगम कार्यालय पहुंचीं और एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। प्रदर्शन कर रहीं कर्मियों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला स्तर के अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ भरोसे के शब्द ही मिले।

आशा कर्मियों के अनुसार, उनकी मांगें नई नहीं हैं। वे लंबे समय से मानदेय, प्रोत्साहन राशि, काम के घंटे, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रही हैं। कई बार बैठकें हुईं, ज्ञापन सौंपे गए और आश्वासन भी दिए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। इसी कारण अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का रास्ता चुनने का निर्णय लिया है।

प्रदर्शन के दौरान आशा कर्मियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा तो मानता है, लेकिन अधिकार और सम्मान देने के मामले में हमेशा पीछे हट जाता है। गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर टीकाकरण, परिवार नियोजन, नवजात शिशुओं की निगरानी और सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का जिम्मा उन्हीं पर है, फिर भी उनकी समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती।

हड़ताल की घोषणा के साथ आशा कर्मियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आंदोलन केवल काम बंद तक सीमित नहीं रहेगा। मंगलवार से वे नगर निगम परिसर में धरना-प्रदर्शन भी शुरू करेंगी। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता या ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हड़ताल लंबी चली, तो शहर की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। खासकर टीकाकरण कार्यक्रम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और घर-घर जाकर की जाने वाली स्वास्थ्य निगरानी पर असर पड़ना तय है। इससे आम लोगों, विशेषकर गरीब और जरूरतमंद तबके को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिलहाल कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। दूसरी ओर, आशा कर्मियों का कहना है कि अब केवल बातचीत से भरोसा नहीं बनेगा, जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।

सोमवार को हुए प्रदर्शन में आशा कर्मियों की एकजुटता साफ दिखाई दी। उन्होंने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन केवल अपने हक के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए है। उनका यह भी कहना था कि यदि आज वे चुप रहीं, तो आने वाले समय में उनकी स्थिति और कमजोर हो जाएगी।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कितनी जल्दी और किस स्तर पर पहल करता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आसनसोल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट गहराना तय माना जा रहा है। आशा कर्मियों के इस फैसले ने एक बार फिर जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की उपेक्षा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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